सीधे बंदरगाहों से नहीं जुड़े राज्यों में लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करने के लिए सरकार जलमार्गों पर कर रही फोकस : वित्त मंत्री


नई दिल्ली, 11 फरवरी (आईएएनएस)। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को कहा कि सरकार इन्फ्रास्ट्रक्चर में केवल सकड़ों और राजमार्गों पर ही नहीं, बल्कि जलमार्गों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है, जिससे ऐसे राज्य भी कम लागत पर सामान एक जगह से दूसरी जगह भेजा जा सके, जो कि समुद्री बंदरगाहों से जुड़े नहीं हैं।

केंद्रीय बजट 2026-27 पर लोकसभा में हुई सामान्य चर्चा का जवाब देते हुए वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा, “हम लॉजिस्टिक्स की लागत कम करने के लिए जलमार्गों पर भी विचार कर रहे हैं, जिससे वे राज्य भी कम लॉजिस्टिक्स लागत पर सामानों को लेनदेन कर पाएं, जो कि समुद्री बंदरगाहों से सीधे कनेक्टेड नहीं हैं।”

उन्होंने आगे बताया कि सरकार का फोकस अधिक श्रम उपयोग वाले सेक्टर पर है। सरकार एमएसएमई को आगे बढ़ाने के लिए लगातार कार्य कर रही है। हमने इस बजट में ऐसी एमएसएमई के लिए सहायता का ऐलान किया है, जो कि अपने सेक्टर में आगे हैं, इससे देश की विकास में काफी मदद मिलेगी।

सीतारमण ने संसद में कहा कि हम यह सुनिश्चित करने के लिए पशुपालन और मत्स्य पालन पर भी जोर दे रहे हैं कि हर जिले में पशु चिकित्सा सर्जन, अस्पताल और परीक्षण प्रयोगशालाएं जैसी सुविधाएं हों।

वित्त मंत्री ने बताया कि इस साल के कर संग्रह में राज्यों की हिस्सेदारी में 25.44 लाख करोड़ रुपए होगी, जो कि पिछले साल के मुकाबले 2.7 लाख करोड़ रुपए अधिक है।

वित्त मंत्री ने देश में रोजगार के नए अवसरों के बार में बताते हुए कहा कि भारत में पांच रीजनल मेडिकल हब बनेंगे, जो मेडिकल टूरिज्म को बढ़ावा देंगे। सिर्फ इस योजना से अगले पांच वर्षों में एक लाख रोजगार के अवसर बनेंगे। वहीं, सरकार की योजना पांच बड़े टेक्सटाइल टू लेदर पार्क बनाने की है, जिसमें बड़ी संख्या में रोजगार के नये मौके बनेंगे।

साथ ही कहा कि वृद्धजनों की देखभाल के लिए बड़ा केयर इकोसिस्टम तैयार कर रहे हैं जिसमें 1.5 लाख केयर गिवर इसी वर्ष प्रशिक्षित किए जाएंगे।

–आईएएनएस

एबीएस/


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