पूर्वी तुर्किस्तान के निर्वासित नेताओं ने यूएन में चीन को 'औपनिवेशिक शक्ति' घोषित करने की लगाई गुहार

वाशिंगटन, 6 मई (आईएएनएस)। ईस्ट तुर्किस्तान गवर्नमेंट-इन-एक्साइल (ईटीजीई) ने यूनाइटेड नेशंस स्पेशल कमिटी ऑन डीकोलोनाइजेशन (सी-24) के सामने एक याचिका दी है, जिसमें महासभा से अपील की गई है कि वह पूर्वी तुर्किस्तान पर चीन को “औपनिवेशिक शक्ति” घोषित करे।
ईटीजीई और ईस्ट तुर्किस्तान नेशनल मूवमेंट (ईटीएनएम) ने मंगलवार को मिलकर 25 पेज की याचिका जमा की है, जिसमें कहा गया है, “औपनिवेशवाद का दौर खत्म नहीं हुआ है। इस पर कानून बनाया जा रहा है।”
याचिका में ईस्ट तुर्किस्तान, जिसे चीन का शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र भी कहा जाता है, को ‘गैर-स्वशासी क्षेत्र’ के तौर पर दर्ज करने की मांग की गई है।
ईटीजीई के मुताबिक, इस तरह के कदम से एक बाध्यकारी अंतर्राष्ट्रीय ढांचा बनेगा, जो यूएन को पूर्वी तुर्किस्तान को आत्मनिर्णय के रास्ते की ओर बढ़ाएगा । निर्वासित अधिकारियों ने कहा कि किसी भी देश या इकाई ने कभी भी किसी यूएन बॉडी के सामने चीन को “औपनिवेशिक शक्ति” के तौर पर आधिकारिक तौर पर चुनौती नहीं दी है।
ईटीजीई के राष्ट्रपति ममतिमिन अला ने कहा, “अस्सी से ज्यादा देशों ने डीकॉलोनाइजेशन फ्रेमवर्क के जरिए स्वतंत्रता हासिल की। आज, पूर्वी तुर्किस्तान के लोग आधिकारिक तौर पर संयुक्त राष्ट्र के सामने उसी अधिकार का दावा करते हैं।” यह कहते हुए कि वैश्विक एजेंसियों में मानवाधिकार का मौजूदा सिस्टम फेल हो गया है।” निर्वासित जनों ने आगे कहा, “शिनजियांग में उइगर, कजाख, किर्गिज और दूसरे तुर्क लोगों के “नरसंहार” को इस महीने 13 साल हो जाएंगे।”
निर्वासित जीवन जी रहे इन लोगों ने चीनी अधिकारियों द्वारा “बड़े पैमाने पर कथित नजरबंदी, ऑर्गन हार्वेस्टिंग, नसबंदी, और लगभग दस लाख बच्चों को उनके परिवारों से अलग करने” का दावा किया।
इसमें यह भी कहा गया कि “कब्जे वाले इलाके” के लिए चीन के अपने पांच साल के प्लान में 2021 और 2025 के बीच 13.75 मिलियन जबरदस्ती लेबर ट्रांसफर का अनुमान लगाया गया है।
ईटीजीई के विदेश मंत्री सालिह हुदयार ने कहा, “नरसंहार जारी है और इसकी जड़ पूर्वी तुर्किस्तान पर चीनी कब्जे के कारण है। उपनिवेशवाद का उन्मूलन और हमारी आजादी की बहाली ही हमारे लोगों के बचने की एकमात्र गारंटी है।”
–आईएएनएस
केआर/