वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बाद भी भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 5.2 प्रतिशत बढ़ा


नई दिल्ली, 24 मार्च (आईएएनएस)। वैश्विक स्तर पर चुनौतियों के बाद भी भारत का कुल निर्यात वित्त वर्ष 26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में 5.2 प्रतिशत बढ़ा है। यह जानकारी सरकार की ओर से संसद में मंगलवार को दी गई।

केंद्रीय वाणिज्य राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-जनवरी अवधि में वस्तुओं और सेवाओं के कुल निर्यात में पिछले वर्ष की इसी अवधि के 679.02 अरब डॉलर की तुलना में 5.26 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह बढ़कर 714.73 अरब डॉलर हो गया।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 2021-22 से 2024-25 की अवधि के दौरान, देश का निर्यात 6.9 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ा है और यह 2020-21 में 497.90 अरब डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 828.25 अरब डॉलर हो गया है।

मंत्री ने कहा कि यह निरंतर विस्तार भारत की विविध और मजबूत निर्यात वृद्धि को बनाए रखने की क्षमता को दिखाता है, जिससे चुनौतीपूर्ण बाहरी परिस्थितियों में भी देश वैश्विक व्यापार में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में स्थापित होता है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश की सक्रिय व्यापार कूटनीति नीतिगत उपायों की पूरक है। 19 मुक्त व्यापार समझौतों और 2021 से नए सिरे से किए गए प्रयासों के साथ, भारत ने प्रमुख साझेदारों के साथ आठ बड़े समझौतों को अंतिम रूप दिया है या उन्हें आगे बढ़ाया है।

मंत्री ने आगे कहा कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए), जो लगभग पूरे यूरोपीय संघ के टैरिफ क्षेत्र तक पहुंच प्रदान करने वाला एक ऐतिहासिक समझौता है, भारत को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में और अधिक गहराई से एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

भारत-ईएफटीए व्यापार और आर्थिक साझेदारी समझौता (टीईपीए) भारत का पहला एफटीए है जिसमें निवेशकों से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) बढ़ाने के उद्देश्य से एक समर्पित प्रतिबद्धता शामिल है।

वहीं, न्यूजीलैंड, ओमान और ब्रिटेन के साथ व्यापार समझौते बाजार पहुंच को व्यापक बनाएंगे, सेवाओं की गतिशीलता को बढ़ाएंगे, दीर्घकालिक निवेश को सुरक्षित करेंगे और व्यवसायों के लिए पूर्वानुमानित नियामक वातावरण का निर्माण करेंगे।

–आईएएनएस

एबीएस/


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