अच्छी इंसान होकर भी मेलोनी ने गलती की, खराब हो गए रिश्ते : डोनाल्ड ट्रंप


अंकारा, 7 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को कहा कि इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने ईरान से जुड़े सैन्य अभियान में अमेरिका का साथ न देकर ‘गलती’ की। इस फैसले की वजह से दोनों देशों के रिश्तों में खटास आ गई।

⁠उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) शिखर सम्मेलन से पहले अंकारा में तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन के साथ बैठक से पहले पत्रकारों से बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि होर्मुज स्‍ट्रेट और ईरान से जुड़े मामले में इटली के सहयोग से इनकार करने के बाद मेलोनी के साथ उनके रिश्ते ‘थोड़े खराब हो गए।’

जब ट्रंप से सोशल मीडिया पर मेलोनी को लेकर की गई एक हालिया पोस्ट के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि वह अच्छी इंसान हैं।”

उन्होंने कहा, “पहले हमारे रिश्ते अच्छे थे, लेकिन फिर थोड़े खराब हो गए क्योंकि उन्होंने हमारी मदद करने से मना कर दिया। मैंने उन पर ज्यादा दबाव नहीं डाला था, लेकिन उन्होंने होर्मुज स्‍ट्रेट के मामले में या कहें कि ईरान के मुद्दे पर, शामिल होने से इनकार कर दिया।”

ट्रंप ने कहा कि इटली के इस फैसले का असर उनके रिश्तों पर पड़ा, हालांकि उन्होंने मेलोनी की तारीफ भी की।

उन्होंने कहा, “इससे मेरे और उनके रिश्ते में थोड़ी खटास आ गई। लेकिन, मैं उन्हें पसंद करता हूं। मुझे लगता है कि वह अच्छी इंसान हैं, लेकिन उन्होंने गलती की।”

राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यूरोपीय देशों का होर्मुज स्‍ट्रेट में स्थिरता बनाए रखने में सीधा हित है क्योंकि वे मध्य पूर्व से आने वाले तेल पर काफी हद तक निर्भर हैं।

उन्होंने कहा, “उन्हें अपना बहुत सारा तेल वहीं से मिलता है। हमें वहां से तेल की जरूरत नहीं है। अमेरिका के पास बहुत ज्यादा तेल है, बल्कि दुनिया में सबसे ज्यादा तेल हमारे पास है।”

उन्होंने आगे कहा, “हमें उस जलडमरूमध्य की जरूरत नहीं है। हम यह इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हमें लगता है कि यह जरूरी है। लेकिन, उन्होंने हमारा साथ नहीं दिया और मैं इससे खुश नहीं था।”

इसी बातचीत के दौरान ट्रंप ने नाटो के कई सहयोगी देशों की भी आलोचना की। उन्होंने कहा, ”ईरान से जुड़े अभियान के दौरान कई देशों ने अमेरिका का साथ नहीं दिया, जबकि अमेरिका लंबे समय से यूरोप की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहा है।”

उन्होंने कहा, ”वह लोगों की परीक्षा ले रहे थे ताकि यह देख सकें कि सहयोगी देश अमेरिका के साथ खड़े होते हैं या नहीं। जर्मनी, फ्रांस, इटली और यूनाइटेड किंगडम सभी ने इस अभियान में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया।”

ट्रंप ने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन की तारीफ भी की। उन्होंने कहा कि ईरान से जुड़े संकट के दौरान तुर्की ने सकारात्मक भूमिका निभाई। ट्रंप के मुताबिक, तुर्की के पास सैन्य रूप से शामिल होने की क्षमता थी, लेकिन उसने ऐसा नहीं किया। इसके बजाय उसने तनाव खत्म करने और संघर्ष समाप्त करने की कोशिशों में मदद की।

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम


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