चेन्नई में देश की पहली सफल रोबोटिक साइटोरडक्टिव सर्जरी सफल

चेन्नई के अपोलो कैंसर सेंटर (एसीसी) के कैंसर रोग विशेषज्ञों ने अपेंडिक्स कैंसर स्यूडोमाइक्सोमा पेरिटोनी (पीएमपी) के लिए हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (एचआइपीईसी) के साथ भारत की पहली रोबोटिक साइटोरडक्टिव सर्जरी (सीआरएस) सफलतापूर्वक की।

साइटोरिडक्टिव सर्जरी (सीआरएस) एक सर्जिकल प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य ट्यूमर वाले रोगियों के पेट में फैलने वाली कैंसर कोशिकाओं को कम करना है।

10 लाख लोगों में से दो लोगों में होती है स्यूडोमाइक्सोमा पेरिटोनी

स्यूडोमाइक्सोमा पेरिटोनी एक दुर्लभ बीमारी है और यह 10 लाख लोगों में से महज दो लोगों में होती है। 51 वर्ष की एक महिला रोगी के गर्भाशय में गांठ थी। इस पर उसके गर्भाशय, अंडाशय, अपेंडिक्स और ओमेंटम के हिस्से को हटाने सहित व्यापक सर्जरी की गई थी।

ऑपरेशन के बाद अपेंडिक्स में म्यूसिनस ट्यूमर का पता चला

हालांकि ऑपरेशन के बाद हिस्टोपैथोलॉजिकल टेस्ट में उसके अपेंडिक्स में म्यूसिनस ट्यूमर का पता चला। जांच में उसे स्यूडोमाइक्सोमा पेरिटोनी (पीएमपी) होने की पुष्टि हुई। अपेंडिक्स कैंसर की मरीज के पेट की परत (पेरिटोनियम) तक फैलने के कारण डॉक्टर अजीत पई और उनकी टीम ने सीधे हाथ की अपेंडिक्स हटाने के लिए रोबोटिक साइटोरिडक्टिव सर्जरी की।

इसके साथ ही उन्होंने कैंसर के संभावित खतरे को खत्म करने के लिए हाइपरथर्मिक इंट्रापेरिटोनियल कीमोथेरेपी (कीमो दवा के साथ गर्म कीमोथेरेपी) की।

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