बांग्लादेश में बढ़ती नशाखोरी और नैतिक पतन से अपराधों में वृद्धि, रिपोर्ट में जताई गई चिंता

ढाका, 5 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में सामाजिक सुरक्षा से जुड़े संकेतकों में चिंताजनक गिरावट दर्ज की जा रही है। बच्चों के साथ दुर्व्यवहार, दुष्कर्म, घरेलू हिंसा और शैक्षणिक संस्थानों में यौन उत्पीड़न जैसी घटनाएं लगातार सुर्खियां बन रही हैं।
एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश में अपराधों में हो रही बढ़ोतरी के पीछे नशे का बढ़ता प्रचलन, नैतिक मूल्यों में गिरावट, सामाजिक निगरानी की कमजोरी और दंड से बच निकलने की संस्कृति प्रमुख कारण हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सामाजिक विश्लेषकों और मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि अपराधों में यह “भयावह” वृद्धि चार प्रमुख कारकों से प्रेरित है। इनमें व्यापक स्तर पर मादक पदार्थों का सेवन, सामाजिक और नैतिक मूल्यों का ह्रास, कमजोर सामाजिक नियंत्रण तथा अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई का अभाव शामिल है।
प्रेसेंज़ा इंटरनेशनल प्रेस एजेंसी की रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में नशीले पदार्थों की उपलब्धता अभूतपूर्व स्तर तक पहुंच चुकी है। शहरी क्षेत्रों से लेकर दूरदराज के ग्रामीण इलाकों तक याबा, गांजा, फेंसिडिल और अत्यधिक खतरनाक ‘आइस’ (क्रिस्टल मेथ) जैसे मादक पदार्थ तेजी से फैल रहे हैं, जिनकी चपेट में बड़ी संख्या में युवा और किशोर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, नशे की लत व्यक्ति की निर्णय लेने की क्षमता और आत्म-नियंत्रण को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। इससे समाज में हिंसक और विकृत मानसिकता को बढ़ावा मिलता है, जिसके कारण महिलाएं और बच्चे अपराधियों का आसान निशाना बन जाते हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में यौन हिंसा और लूटपाट के अधिकांश मामलों का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध मादक पदार्थों के सेवन से जुड़ा हुआ पाया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों द्वारा समय-समय पर चलाए जाने वाले अभियानों के बावजूद नशीले पदार्थों के कारोबार पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग पाया है। इसकी वजह एक मजबूत और संगठित आपराधिक नेटवर्क को बताया गया है, जिसमें समाज के प्रभावशाली वर्गों की मिलीभगत होने की आशंका जताई गई है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि बच्चों के यौन शोषण और उत्पीड़न की घटनाएं अब उन स्थानों से भी सामने आ रही हैं, जिन्हें पारंपरिक रूप से सुरक्षित माना जाता था। मदरसों, अनाथालयों, आवासीय विद्यालयों और धार्मिक संस्थानों में भी ऐसे मामलों का खुलासा होने से गंभीर चिंता पैदा हुई है।
विशेषज्ञों ने जोर देकर कहा कि अपराधी चाहे शिक्षक हो, इमाम, राजनेता, चिकित्सक या कोई सामान्य नागरिक, कानून की नजर में उसकी पहचान केवल एक अपराधी की होनी चाहिए। समाज को सत्ता, पद या संस्थागत पहचान के आधार पर अपराधियों को संरक्षण देने की प्रवृत्ति से बाहर निकलना होगा।
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि बांग्लादेश को एक सुरक्षित और मानवीय राष्ट्र बनाए रखना है, तो सरकार, समाज, परिवारों और धार्मिक संस्थानों को मिलकर काम करना होगा। बच्चों की सुरक्षा किसी एक संस्था की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे समाज का सामूहिक नैतिक दायित्व है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समय रहते इस सामाजिक गिरावट के खिलाफ ठोस कदम उठाना आवश्यक है।
–आईएएनएस
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