भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की पहली किस्त जल्द होगी साइन: वाणिज्य सचिव


नई दिल्ली, 15 जनवरी (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते (ट्रेड डील) की पहली किस्त (ट्रांश) को लेकर सहमति लगभग बन चुकी है और इसे जल्द अंतिम रूप दिया जा सकता है। हालांकि, इस पर हस्ताक्षर की कोई तय समयसीमा अभी नहीं दी जा सकती। यह जानकारी गुरुवार को वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने दी।

उन्होंने बताया कि दिसंबर के अंतिम सप्ताह में भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (यूएसटीआर) जैमीसन ग्रीर के बीच वर्चुअल बैठक हुई थी। इसके बाद से दोनों देशों की वार्ता टीमें लगातार संपर्क में हैं और सहमति बनाने की दिशा में बातचीत जारी है।

वाणिज्य सचिव ने कहा कि इस व्यापार समझौते से भारतीय निर्यात पर अमेरिका द्वारा लगाए गए टैरिफ में राहत मिलने की उम्मीद है। वर्तमान में अमेरिका ने अधिकांश भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क लगाया हुआ है, जो दुनिया में सबसे अधिक में से एक है।

अग्रवाल ने उम्मीद जताई कि अमेरिका को होने वाला भारतीय निर्यात सकारात्मक बना रहेगा। उन्होंने बताया कि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र की खेप, जो फिलहाल टैरिफ से मुक्त है, निर्यात को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभा रही है, हालांकि अन्य क्षेत्रों पर ऊंचे शुल्क का असर अब भी बना हुआ है।

उन्होंने कहा कि दोनों देश इस समझौते को लेकर प्रतिबद्ध हैं और बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है।

इस बीच, भारत में नव नियुक्त अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने भी कहा है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता सक्रिय रूप से जारी है। उन्होंने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने “मित्र” प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए शुभकामनाएं भेजी हैं।

गोर ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रंप और प्रधानमंत्री मोदी के बीच दोस्ती वास्तविक है। अमेरिका और भारत केवल साझा हितों से ही नहीं, बल्कि उच्चतम स्तर पर मजबूत रिश्तों से जुड़े हैं। सच्चे मित्र मतभेदों को अंततः सुलझा ही लेते हैं।”

उन्होंने यह भी कहा कि व्यापार दोनों देशों के रिश्तों का अहम हिस्सा है, लेकिन इसके अलावा सुरक्षा, आतंकवाद-रोधी सहयोग, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्रों में भी भारत-अमेरिका सहयोग जारी रहेगा।

अमेरिकी राजदूत ने यह भी घोषणा की कि अगले महीने भारत को ‘पैक्ससिलिका’ पहल में पूर्ण सदस्य के रूप में शामिल होने का निमंत्रण दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह पहल सुरक्षित और नवाचार आधारित सिलिकॉन सप्लाई चेन विकसित करने के लिए शुरू की गई है, जिसमें महत्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा से लेकर उन्नत विनिर्माण, सेमीकंडक्टर, एआई विकास और लॉजिस्टिक्स तक शामिल हैं।

गोर ने कहा कि जापान, दक्षिण कोरिया, ब्रिटेन और इज़राइल पहले ही इस पहल में शामिल हो चुके हैं और भारत की भागीदारी से यह समूह और मजबूत होगा।

–आईएएनएस

डीएससी


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