सीएम सुक्खू ने हिमाचल दिवस पर कृषि, बागवानी पैनल की घोषणा की

प्रागपुर, 25 जनवरी (आईएएनएस)। राज्य स्थापना दिवस के मौके पर हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सुक्खू ने रविवार को किसानों और बागवानों की भागीदारी सुनिश्चित करने और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए एक कृषि और बागवानी आयोग के गठन की घोषणा की। उन्होंने कहा कि सरकार विधानसभा के आने वाले बजट सत्र में इस आयोग को स्थापित करने के लिए एक बिल पेश करेगी।
राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए, मुख्यमंत्री ने कमांडिंग ऑफिसर तरुणा के नेतृत्व में परेड टुकड़ियों से सलामी ली। इस मौके पर लोगों को बधाई देते हुए, सीएम सुक्खू ने राज्य को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और हिमाचल प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री डॉ. वाई.एस. परमार के योगदान को याद किया।
मुख्यमंत्री ने जसवां विधानसभा क्षेत्र में प्रागपुर में सब-डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) कार्यालय और नलसुहा में पब्लिक हेल्थ सेंटर खोलने की भी घोषणा की। उन्होंने कहा कि जब सरकार ने कार्यभार संभाला, तो पिछली सरकार ने कर्मचारियों के वेतन और पेंशन के बकाया के कारण 10,000 करोड़ रुपए से ज्यादा की देनदारियां छोड़ी थीं।
फिलहाल, वेतन, पेंशन और अन्य बकाया से संबंधित कुल बकाया राशि 8,555 करोड़ रुपए है। राज्य की खराब वित्तीय स्थिति के बावजूद, उन्होंने घोषणा की कि 70 वर्ष और उससे अधिक उम्र के पेंशनभोगियों और पारिवारिक पेंशनभोगियों के बकाया का पूरा भुगतान जनवरी में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस उद्देश्य के लिए 90 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
उन्होंने कहा कि 1 जनवरी, 2016 और 31 दिसंबर, 2021 के बीच रिटायर हुए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पेंशन और संबंधित लाभों में संशोधन के कारण ग्रेच्युटी और लीव एनकैशमेंट का बकाया मिला है।
उन्होंने घोषणा की कि जनवरी में उन्हें ग्रेच्युटी बकाया का अतिरिक्त 50 प्रतिशत और लीव एनकैशमेंट बकाया का 70 प्रतिशत भुगतान किया जाएगा, जिस पर 96 करोड़ रुपए खर्च होंगे।
सीएम सुक्खू ने कहा कि यह अवसर पिछले 55 वर्षों की उपलब्धियों का आकलन करने और इस बात पर विचार करने का मौका देता है कि आने वाले वर्षों में राज्य को किस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए।
जिम्मेदारी और दूरदर्शिता की इसी भावना के साथ, सरकार ने ‘समृद्ध हिमाचल विजन’ नामक एक दस्तावेज तैयार करना शुरू किया है, जो अब अपने अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि यह विजन दस्तावेज पूरे राज्य के लोगों, विशेषज्ञों, प्रशासन और संस्थानों के साथ व्यापक विचार-विमर्श के बाद तैयार किया जाएगा।
दस्तावेज का मसौदा तैयार करते समय, राज्य के पर्यावरण, मेहनती लोगों की आकांक्षाओं और इसकी मजबूत सामाजिक परंपराओं पर उचित ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य ऐसा विकास करना है जो पर्यावरण की दृष्टि से टिकाऊ हो, आपदा प्रतिरोधी हो और समाज के सभी वर्गों को शामिल करे।
–आईएएनएस
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