चीनी अंडरवॉटर डेटा सेंटर समुद्र और पड़ोसी देशों के लिए खतरा : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 16 अप्रैल (आईएएनएस)। चीन के कमर्शियल अंडरवॉटर डेटा सेंटरों को लेकर अमेरिकी विशेषज्ञ काफी चिंतित हैं। उनका मानना है कि ये समुद्र के लिए खतरा बन सकते हैं, क्योंकि इनसे काफी ज्यादा गर्मी बाहर निकलती है। इससे पड़ोसी देशों जैसे वियतनाम और फिलीपींस पर भी बुरा असर पड़ सकता है।
चीन ने अपना पहला कमर्शियल अंडरवॉटर डेटा सेंटर हैनान द्वीप के दक्षिण-पूर्वी तट के पास, साउथ चाइना सी के उथले पानी में लगाया है। इस प्रोजेक्ट को ‘हाइलान्सिन’ नाम की कंपनी ने बनाया है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह सेंटर अब एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) और बिग डेटा पर काम करने वाली इंटरनेट कंपनियों को डेटा स्टोरेज और कंप्यूटिंग सेवाएं दे रहा है।
‘हाइलान्सिन’ पहले चीनी नौसेना के लिए भी काम कर चुकी है। कंपनी को स्मार्ट शिप सिस्टम, समुद्री डेटा और समुद्र के नक्शे बनाती थी। 2022 में अमेरिका के कॉमर्स डिपार्टमेंट ने इस कंपनी को ब्लैकलिस्ट कर दिया था। आरोप था कि इसने अमेरिकी तकनीक का इस्तेमाल करके ऐसे सिस्टम बनाए, जिनसे रूस को यूक्रेन के तट के पास पनडुब्बियों, गोताखोरों और युद्धपोतों पर नजर रखने में मदद मिल सकती थी।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन समुद्र को सिर्फ एक संसाधन ही नहीं, बल्कि एक रणनीतिक हथियार की तरह भी इस्तेमाल कर रहा है। यानी एआई के बढ़ते इस्तेमाल से होने वाला पर्यावरणीय नुकसान वह समुद्र में डाल रहा है, जो पूरी दुनिया की साझा संपत्ति है, और साथ ही सस्ते एआई कंप्यूट का सबसे बड़ा सप्लायर बनने की दौड़ में लगा है।
एक सामान्य अंडरवॉटर डेटा सेंटर पॉड करीब 500 किलोवाट से एक मेगावाट तक बिजली खर्च करता है। ‘हाइलान्सिन’ की योजना 100 पॉड लगाने की है, यानी कुल मिलाकर 50 से 100 मेगावाट तक ऊर्जा इस्तेमाल होगी।
अगर 100 मेगावाट की गर्मी लगातार समुद्र में छोड़ी जाए तो हर सेकंड लगभग दस करोड़ जूल ऊर्जा पानी में जाती है।
भले ही इसमें एडवांस कूलिंग सिस्टम लगे हों, फिर भी इतनी ज्यादा गर्मी आसपास के समुद्री पानी के बड़े हिस्से का तापमान कुछ ही घंटों में बढ़ा सकती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि आर्थिक तरक्की के लिए चीन का पर्यावरण रिकॉर्ड पहले से ही कमजोर रहा है। उदाहरण के लिए, दुर्लभ खनिजों के उत्पादन में चीन सबसे आगे है, लेकिन इसके लिए बहुत बड़ा पर्यावरणीय नुकसान हुआ है। हजारों वर्ग किलोमीटर जमीन और झीलें खराब हो चुकी हैं और आसपास रहने वाले लोगों की सेहत पर भी बुरा असर पड़ा है। एक टन दुर्लभ खनिज निकालने पर करीब 2000 टन कचरा और जहरीला पानी पैदा होता है।
हालांकि, अभी ये अंडरवॉटर डेटा सेंटर चीन के अपने तटीय इलाकों में हैं और पड़ोसी देशों से कुछ दूरी पर हैं, लेकिन समुद्र कोई बंद सिस्टम नहीं है। इसमें छोड़ी गई गर्मी धीरे-धीरे पूरे समुद्री सिस्टम में फैल जाती है।
‘हाइलान्सिन’ का कहना है कि उनके सिस्टम से पानी का तापमान ज्यादा से ज्यादा दो डिग्री सेल्सियस तक ही बढ़ता है, जो कंट्रोल में है। आलोचकों का कहना है कि समुद्र को ‘फ्री हीट सिंक’ की तरह इस्तेमाल करना गलत है, क्योंकि यह पूरी दुनिया की साझा संपत्ति है।
रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले समय में चीन सस्ती एआई सेवाएं (टोकन) दुनिया को बेचना शुरू कर सकता है, जो सस्ती ऊर्जा और अंडरवॉटर इंफ्रास्ट्रक्चर से चलेंगी। जैसे पहले सोलर पैनल और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के साथ हुआ, वैसे ही लोग इन एआई सेवाओं को भी तेजी से अपनाएंगे। भले ही उनके पीछे होने वाले पर्यावरणीय नुकसान पर ज्यादा ध्यान न दिया जाए।
–आईएएनएस
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