केंद्र सरकार को वित्त वर्ष 25 में पीएसयू से मिला 74,106 करोड़ रुपये का डिविडेंड


नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। वित्त वर्ष 2024-25 में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) से सरकार को 74,016 करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त हुआ है जो कि वित्त वर्ष 2023-24 में प्राप्त हुए 63,749.3 करोड़ रुपये के डिविडेंड से अधिक है। निवेश और लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) द्वारा संकलित किए गए आंकड़ों से यह जानकारी प्राप्त हुई।

31 मार्च, 2025 को समाप्त वित्त वर्ष में केंद्र को पीएसयू से मिलने वाला कुल डिविडेंड बजट के संशोधित अनुमान 55,000 करोड़ रुपये से अधिक है।

बीते वित्त वर्ष में केंद्र सरकार को कोल इंडिया लिमिटेड से सबसे अधिक 10,252 करोड़ रुपये का डिविडेंड प्राप्त हुआ है। इसके बाद दूसरे नंबर पर ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन से 10,002 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला है।

टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स (इंडिया) से 3,761.50 करोड़ रुपये और हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड से 3,619.06 करोड़ रुपये का डिविडेंड सरकार को प्राप्त हुआ है।

वहीं, बीपीसीएल से सरकार को 3,562.47 करोड़ रुपये का डिविडेंड मिला है।

प्रत्येक पीएसयू को कर के बाद अपने लाभ का 30 प्रतिशत या अपने नेटवर्थ का 4 प्रतिशत न्यूनतम वार्षिक डिविडेंड देना आवश्यक है।

वित्त वर्ष 2024-2025 में पीएसयू से 55,000 करोड़ रुपये के डिविडेंड कलेक्शन का संशोधित अनुमान जारी किया था। चालू वित्त वर्ष के लिए यह आंकड़ा 69,000 करोड़ रुपये निर्धारित किया गया है।

इसके अलावा, एक फरवरी को दिए बजट भाषण में वित्त मंत्री सीतारमण ने कहा था कि वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) और पब्लिक सेक्टर के बैंकों से 2.56 लाख करोड़ रुपये डिविडेंड के रूप में मिलने की उम्मीद है।

वित्त वर्ष 2024-25 में आरबीआई द्वारा सरकार को 2.1 लाख करोड़ रुपये का डिविडेंड दिया गया था। ऐसे में चालू वित्त वर्ष के लिए तय किया गया डिविडेंड का आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।

केंद्र सरकार के पीएसयू को अपनी नेटवर्थ का 4 प्रतिशत डिविडेंड देना अनिवार्य है। पहले यह 5 प्रतिशत था। वहीं, पब्लिक सेक्टर की एनबीएफसी को अपने मुनाफे का 30 प्रतिशत डिविडेंड के रूप में देना अनिवार्य है।

–आईएएनएस

एबीएस/


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