भाजपा सांसद खंडेलवाल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखा पत्र, दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करने की मांग

नई दिल्ली, 25 फरवरी (आईएएनएस)। भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने बुधवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर दिल्ली का नाम बदलकर इंद्रप्रस्थ करने का आग्रह किया, ताकि इसकी प्राचीन पहचान और सांस्कृतिक विरासत को फिर से स्थापित किया जा सके।
भाजपा सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने अपने पत्र में कहा कि दिल्ली नाम इतिहास के अपेक्षाकृत बाद के कालखंड से जुड़ा है, जबकि राजधानी की मूल पहचान इंद्रप्रस्थ रही है। उन्होंने तर्क दिया कि भारत विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में से एक है और उसकी राष्ट्रीय राजधानी का नाम भी उसके गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।
उन्होंने उल्लेख किया कि ऐतिहासिक साहित्य, पुरातात्विक साक्ष्य और सभ्यतागत परंपराएं इस बात की पुष्टि करती हैं कि वर्तमान दिल्ली ही प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थल है, जिसकी स्थापना पांडवों ने की थी। महाकाव्य महाभारत में इंद्रप्रस्थ को यमुना नदी के तट पर बसा एक समृद्ध और भव्य नगर बताया गया है, जो आज की दिल्ली के भौगोलिक स्वरूप से मेल खाता है।
खंडेलवाल ने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा पुराना किला में की गई खुदाई में लगभग 1000 ईसा पूर्व के प्राचीन बसावट के प्रमाण मिले हैं। इनमें पेंटेड ग्रे वेयर संस्कृति के अवशेष भी शामिल हैं, जिन्हें महाभारत काल से जोड़ा जाता है। उनके अनुसार ये साक्ष्य इस धारणा को मजबूत करते हैं कि प्राचीन इंद्रप्रस्थ का स्थान वर्तमान दिल्ली ही है।
सांसद ने सुझाव दिया कि दिल्ली में किसी उपयुक्त स्थान, संभवतः पुराना किला परिसर में, पांडवों की प्रतिमाएं स्थापित की जाएं, ताकि राजधानी की प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को साकार रूप में प्रदर्शित किया जा सके।
इसके साथ ही खंडेलवाल ने एक अलग पत्र दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता को भी भेजा है, जिसमें उन्होंने दिल्ली विधानसभा में इंद्रप्रस्थ नामकरण के समर्थन में प्रस्ताव पारित कराने का आग्रह किया है।
उन्होंने कहा कि देश में मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और प्रयागराज जैसे शहरों के ऐतिहासिक नाम पुनर्स्थापित किए जा चुके हैं। ऐसे में दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्थ करना भी राष्ट्रीय गौरव और सांस्कृतिक निरंतरता को सुदृढ़ करने वाला कदम होगा।
खंडेलवाल ने गृह मंत्री से इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और अन्य विशेषज्ञों से परामर्श कर इस संबंध में औपचारिक प्रक्रिया शुरू करने का अनुरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह पहल भारत की प्राचीन विरासत को सम्मान देने और उसे संरक्षित रखने की प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।
–आईएएनएस
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