बिहार तरक्की नहीं, बर्बादी की तरफ बढ़ रहा : एआईएमआईएम विधायक अख्तरुल ईमान


पटना, 6 अप्रैल (आईएएनएस)। अमौर से एआईएमआईएम के विधायक और बिहार विधानसभा की अल्पसंख्यक कल्याण समिति के सभापति अख्तरुल ईमान ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि बिहार तरक्की की तरफ नहीं, बल्कि बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है।

एआईएमआईएम की बिहार इकाई के अध्यक्ष और विधायक अख्तरुल ईमान ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा, “बिहार में पिछले कई सालों से शिक्षा व्यवस्था चौपट हो चुकी है। स्वास्थ्य सुविधाएं चरमरा चुकी हैं। सरकार का खजाना भी खाली हो चुका है। विकास के सारे काम रुक चुके हैं और थम पड़े हुए हैं। पहला अवसर है कि बजट को बढ़ाया गया है, लेकिन विकास की स्कीमों पर राशि को घटाया गया है। बिहार तरक्की की तरफ नहीं, बल्कि बर्बादी की तरफ बढ़ रहा है।”

उन्होंने महिला आरक्षण विधेयक के विषय पर भी प्रतिक्रिया दी। केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, “जब 5 राज्यों में विधानसभा चुनाव चल रहे हैं, सांसद अपनी-अपनी पार्टियों के लिए वहां रैलियां करेंगे या संसद की कार्यवाही में शामिल होंगे। यह सही समय नहीं था। इस विधेयक को या बहुत पहले ले आना चाहिए था या चुनाव के बाद संसद में रखना चाहिए था। भाजपा इसे कहीं न कहीं चुनावी मुद्दा बनाना चाहती है।”

इसी बीच, उन्होंने गुजरात में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के फैसला का विरोध किया है। उन्होंने आरोप लगाए कि सीसी के नाम पर विशेष वर्ग के लोगों को टारगेट किया जा रहा है।

उन्होंने कहा, “यह विधेयक गैर कानूनी है। यह मौलिक अधिकार का उल्लंघन है। समान का मतलब सभी के लिए एक जैसे नियम होते हैं। जब अलग-अलग नियम दे रहे थे तो यह समान नहीं होता है। यूसीसी के नाम पर विशेष वर्ग के लोगों को टारगेट किया जा रहा है।”

बता दें कि हाल ही में गुजरात विधानसभा ने कई घंटों की बहस के बाद समान नागरिक संहिता विधेयक पास किया था। गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने सदन में यह बिल पेश किया था। इसके साथ ही उत्तराखंड के बाद गुजरात देश का दूसरा ऐसा राज्य बना, जिसने यूसीसी को अपनाया। उत्तराखंड पहला ऐसा राज्य था, जिसने फरवरी 2024 में यूसीसी बिल पास किया।

‘गुजरात यूनिफॉर्म सिविल कोड, 2026’ कानून पूरे राज्य में लागू होगा। हालांकि, विधेयक में साफ किया गया है कि यह कोड अनुसूचित जनजातियों (एसटी) के सदस्यों और कुछ ऐसे समूहों पर लागू नहीं होगा जिनके पारंपरिक अधिकार संविधान के तहत सुरक्षित हैं।

–आईएएनएस

डीसीएच/


Show More
Back to top button