दिल्ली: इन्वेस्टमेंट फ्रॉड केस में क्राइम ब्रांच की बड़ी कार्रवाई, तीन आरोपी गिरफ्तार


नई दिल्ली, 10 फरवरी (आईएएनएस)। दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच की साइबर सेल को इन्वेस्टमेंट फ्रॉड के एक बड़े मामले में अहम सफलता मिली है। ऑर्गनाइज्ड साइबर-इनेबल्ड फाइनेंशियल फ्रॉड के खिलाफ चल रही कार्रवाई के तहत उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में एक कोऑर्डिनेटेड ऑपरेशन किया गया, जिसमें इस रैकेट से जुड़े तीन आरोपियों को पकड़ा गया है। इस मामले में पहले भी दो आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और अब कुल मिलाकर पांच आरोपी पुलिस की गिरफ्त में आ चुके हैं।

पुलिस के अनुसार, इस मामले की शिकायत नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। शिकायतकर्ता एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत है और टेक्नोलॉजी सेक्टर से जुड़ा हुआ है। आरोप है कि उसे शेयर मार्केट में आईपीओ में निवेश कराने के नाम पर झांसा दिया गया और करीब 31 लाख रुपए की ठगी कर ली गई। ठगों ने खुद को एक बड़ी इन्वेस्टमेंट कंपनी का प्रतिनिधि बताकर एक फर्जी और खुद से डिजाइन की गई वेबसाइट के जरिए निवेश का ऑफर दिया था।

जांच में सामने आया कि साइबर फ्रॉड सिंडिकेट ने लोगों को ज्यादा रिटर्न का लालच देकर बड़ी रकम ट्रांसफर करवाने की साजिश रची थी। पीड़ितों का भरोसा जीतने के लिए नकली ऑनलाइन इन्वेस्टमेंट पोर्टल बनाए गए थे, जिन पर फर्जी आंकड़े और मुनाफा दिखाया जाता था। इस पूरे नेटवर्क में म्यूल बैंक अकाउंट्स का इस्तेमाल किया गया, जिनके जरिए ठगी की रकम को इधर-उधर किया जाता था।

पकड़े गए आरोपियों में सर्वजीत नामक व्यक्ति शामिल है, जो सहारनपुर का रहने वाला है और एलएलबी की पढ़ाई कर चुका है। उसने पैसों के लालच में सर्वहित मानव सेवा समिति के नाम पर एक म्यूल बैंक अकाउंट उपलब्ध कराया था, जिसे आगे सह-आरोपी पवन और पुनीत को सौंप दिया गया। दूसरा आरोपी पवन भी सहारनपुर का निवासी है और उसने साइबर अपराधियों के लिए म्यूल बैंक अकाउंट्स की व्यवस्था कर उन्हें सप्लाई करने का काम किया। तीसरे आरोपी पुनीत ने पहले से गिरफ्तार एक आरोपी दीपक सैनी और सर्वजीत से बैंक अकाउंट किट लेकर उन्हें साइबर फ्रॉड सिंडिकेट तक पहुंचाया।

पुलिस ने आरोपियों को इंटेंसिव टेक्निकल सर्विलांस और लोकल इंटेलिजेंस की मदद से ट्रेस कर गिरफ्तार किया। इस ऑपरेशन को इंस्पेक्टर सुभाष चंद्र के नेतृत्व में एक विशेष टीम ने अंजाम दिया, जिसमें एसआई जगसीर सिंह, हेड कांस्टेबल मोहित मलिक, हेड कांस्टेबल गौरव और कांस्टेबल सुरेश शामिल थे। यह पूरी कार्रवाई एसीपी अनिल शर्मा की निगरानी में की गई। पुलिस का कहना है कि मामले में आगे की जांच जारी है और इस रैकेट से जुड़े अन्य लोगों की तलाश की जा रही है।

–आईएएनएस


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