बांग्लादेश: जमात-ए-इस्लामी अमीर का बयान, ‘कोई महिला पार्टी प्रमुख नहीं बन सकती’

ढाका, 30 जनवरी (आईएएनएस)। बांग्लादेश की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के अमीर (प्रमुख) शफीकुर रहमान ने कहा है कि धार्मिक दायित्वों और “जैविक सीमाओं” के कारण कोई भी महिला कभी पार्टी की प्रमुख नहीं बन सकती।
अल जज़ीरा को दिए एक साक्षात्कार में जब उनसे पूछा गया कि क्या भविष्य में कोई महिला जमात-ए-इस्लामी का नेतृत्व कर सकती है, तो शफीकुर रहमान ने कहा, “यह संभव नहीं है। यह संभव नहीं है क्योंकि अल्लाह ने हर किसी को अलग-अलग स्वरूप में बनाया है। एक पुरुष कभी बच्चे को जन्म नहीं दे सकता।”
द डेली स्टार की रिपोर्ट के अनुसार, अल जज़ीरा के हवाले से उन्होंने यह भी कहा कि पुरुष कभी बच्चे को स्तनपान नहीं करा सकते। जमात प्रमुख ने कहा, “यह ईश्वर प्रदत्त है। पुरुषों और महिलाओं के बीच कुछ अंतर हैं। जो अल्लाह ने बनाया है, उसे हम बदल नहीं सकते।”
आगामी बांग्लादेश संसदीय चुनावों में जमात-ए-इस्लामी की ओर से महिला उम्मीदवारों की संख्या के सवाल पर उन्होंने कहा, “एक भी नहीं।” हालांकि, उन्होंने इसे समय और बांग्लादेश की राजनीतिक संस्कृति से जुड़ा मामला बताया।
उन्होंने कहा, “आप अन्य दलों में भी महिलाओं की कोई बड़ी संख्या नहीं देखेंगे, क्योंकि यह बांग्लादेश की सांस्कृतिक संरचना है। लेकिन हम इसके लिए तैयारी कर रहे हैं।”
जब साक्षात्कारकर्ता ने यह उल्लेख किया कि बांग्लादेश में पहले महिलाएं प्रधानमंत्री रह चुकी हैं, तो शफीकुर रहमान ने अपनी बात दोहराते हुए कहा, “दुनिया के अधिकांश देशों ने भी इसे व्यावहारिक नहीं माना है। यही विश्व की वास्तविकता है।”
इस सप्ताह की शुरुआत में आई एक रिपोर्ट में कहा गया था कि 12 फरवरी को होने वाले बांग्लादेश के 13वें संसदीय चुनाव दो बातों के लिए खास हैं- देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अवामी लीग की गैर-भागीदारी और चुनाव में महिलाओं की बेहद कम भागीदारी।
रिपोर्ट के अनुसार, अंतरिम सरकार के प्रमुख मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली सरकार ने कथित कुशासन के आरोपों में अवामी लीग पर प्रतिबंध लगा दिया, जिसके चलते पार्टी चुनाव नहीं लड़ पा रही है। यूरेशिया रिव्यू की एक रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि यूनुस सरकार के दौरान बढ़ती अराजकता और महिलाओं के प्रति असहिष्णुता के कारण चुनावों में महिला उम्मीदवारों की संख्या कम रही है।
हालांकि, अवामी लीग पर प्रतिबंध की आलोचना करते हुए उसके समर्थकों का कहना है कि पार्टी की अनुपस्थिति से चुनावों की वैधता पर सवाल उठेंगे, लेकिन नागरिक समाज और अन्य राजनीतिक दलों ने यूनुस सरकार के इस फैसले को स्वीकार कर लिया है।
–आईएएनएस
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