बांग्लादेश : अंतरिम सरकार से स्पष्ट चुनावी रोडमैप की मांग, बीएनपी की देशव्यापी विरोध प्रदर्शन की योजना


ढाका, 5 अप्रैल (आईएएनएस)। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) राष्ट्रीय चुनाव के लिए स्पष्ट रोडमैप प्रदान करने में अंतरिम सरकार की नाकामी को उजागर करने के लिए सहयोगियों के साथ देशव्यापी विरोध प्रदर्शन करने पर विचार कर रही है।

बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी ने शनिवार को बताया कि पार्टी ढाका में बड़े पैमाने पर सार्वजनिक रैली आयोजित करेगी और अंतरिम सरकार को चुनाव की तारीख की घोषणा करने के लिए समय सीमा तय करेगी।

रैलियों का सिलसिला मई तक जारी रहेगा।

25 मार्च को राष्ट्र के नाम टेलीविजन संबोधन में यूनुस ने कहा कि चुनाव दिसंबर 2025 और जून 2026 के बीच होंगे। उन्होंने कहा कि सर्वसम्मति आयोग सभी राजनीतिक दलों से सुधारों पर सक्रिय रूप से राय एकत्र कर रहा है।

बीएनपी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि अंतरिम सरकार का कार्यकाल बढ़ाने और चुनाव में देरी करने का जानबूझकर प्रयास किया जा रहा है।

पार्टी ने चेतावनी दी कि अगर दिसंबर तक चुनाव नहीं हुए तो लोगों में अस्थिरता और ‘तीव्र आक्रोश’ पैदा हो सकता है।

बीएनपी महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर ने यूनुस के बयान पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “मैं बहुत निराश हूं कि मुख्य सलाहकार ने 25 मार्च को अपने भाषण में स्पष्ट चुनाव रोडमैप का उल्लेख नहीं किया। मेरा मानना ​​है कि चुनाव रोडमैप का अभाव सरकार की राजनीतिक अनुभवहीनता को दर्शाता है।”

फरवरी में एक सम्मेलन को संबोधित करते हुए, बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष तारिक रहमान ने यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार पर बांग्लादेश में अस्थिरता पैदा करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा, “पिछले कुछ समय से हम इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि सरकार के कुछ अधिकारी लोगों के अधिकारों की बहाली के बारे में विरोधाभासी टिप्पणियां कर रहे हैं। परिणामस्वरूप, विभिन्न क्षेत्रों में अशांति फैल गई है।”

बांग्लादेश में राजनीतिक संगठनों की बहुचर्चित एकता, जो अगस्त 2024 में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के नेतृत्व वाली लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित अवामी लीग सरकार को हटाने के दौरान पूरी तरह से प्रदर्शित हुई थी, धीरे-धीरे फीकी पड़ रही है।

पिछले सात महीनों में देश के संकट में फंसने के साथ, कई राजनीतिक नेता, जो पहले यूनुस का समर्थन करते थे, अब उनकी खुलकर आलोचना कर रहे हैं, खासकर राष्ट्रीय चुनाव कराने में हुई लंबी देरी को लेकर।

–आईएएनएस

एमके/


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