सेना प्रमुख जनरल पांडे ने बदलाव के बताए चार प्रमुख कारक

सेना प्रमुख जनरल मनोज पांडे ने मंगलवार को कहा कि वर्तमान भू-रणनीतिक परि²श्य में बड़ी तेजी से बदलाव हो रहा है। ऐसे दौर में युद्ध रोकने के लिए सैन्य ताकत और क्षमताएं आवश्यक हैं। राष्ट्र की सुरक्षा को न तो आउटसोर्स किया जा सकता है और न ही दूसरों की उदारता पर निर्भर रहा जा सकता है। इसलिए खतरों के प्रति मजबूत प्रतिक्रिया देने और आवश्यकता पड़ने पर युद्ध जीतने में भी सक्षम होना चाहिए।

यहां एक कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि हाल के भू-राजनीतिक पावरप्ले ने प्रदर्शित किया है कि जहां राष्ट्रीय हित का सवाल उठता है तो देश युद्ध से पीछे नहीं हटते। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र का समग्र विकास तब ही कहा जा सकता है जब उसकी राष्ट्रीय शक्ति में उल्लेखनीय और निरंतर वृद्धि होती है। उन्होंने कहा कि जहां आर्थिक शक्ति राष्ट्र के विकास का स्त्रोत है वहीं वह सैन्य ताकत ही होती है जो उसे रणनीतिक क्षितिज के विस्तार, अपने हितों की रक्षा और आगे बढ़ने के लिए आवश्यक क्षमता प्रदान करती है।

उन्होंने कहा कि आज के हालात में किसी भी देश की हार्ड पावर की अहमियत फिर से बढ़ी है। उन्होंने आत्मनिर्भरता के माध्यम से हार्ड पावर क्षमताओं को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कारकों को भी रेखांकित किया। कहा- विघटनकारी प्रौद्योगिकी की असीमित क्षमता, आधुनिक युद्धों के बदलते चरित्र, सामाजिक आर्थिक क्षेत्र में गहन बदलाव और मौजूदा वैश्विक भू-राजनीति के रुझान भारतीय सेना में बदलाव के चार प्रमुख कारक हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय सेना का विजन एक आधुनिक, तकनीकी रूप से सक्षम और आत्मनिर्भर भविष्य के लिए तैयार सेना में तब्दील होना है जोकि मल्टी डोमेन आपरेशन स्थिति में राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए भी युद्ध रोकने के अलावा उसे जीतने में भी सक्षम हो। उन्होंने कहा कि सेना के परिवर्तित रोडमैप में पांच चीजें शामिल हैं – बल पुनर्गठन और अनुकूलन, आधुनिकीकरण और प्रौद्योगिकी का समावेश, प्रणालियों-प्रक्रियाओं और कार्यों में सुधार, मानव संसाधन प्रबंधन और तीनों सेनाओं के एकीकरण को बढ़ावा देना।

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