नित्यानंद राय के बयान से नाराज विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से किया वॉकआउट, बोले – 'आरोप साबित करें'

नई दिल्ली, 2 अप्रैल (आईएएनएस)। राज्यसभा में बुधवार को ‘इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल, 2025’ पर चर्चा का जवाब देते हुए केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने विपक्ष पर घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाया, जिस पर विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई और सदन से वॉकआउट किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत में विदेशियों के आव्रजन, प्रवेश और ठहरने को विनियमित करना है।
गृह राज्य मंत्री ने आरोप लगाते हुए कहा कि केंद्र में कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकार और पश्चिम बंगाल की मौजूदा तृणमूल सरकार अवैध प्रवासियों को देश में घुसपैठ करने में मदद कर रही है और उन्हें मतदाता सूची तथा राशन कार्ड में शामिल कर रही है। उनके इस बयान पर विपक्षी सांसदों ने कड़ी आपत्ति जताई।
सदन से वॉकआउट करने के बाद कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी ने कहा कि गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन की परंपराओं का उल्लंघन किया और बिना तथ्यों के झूठे आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “ऐसा मंत्री गृह राज्य मंत्री के रूप में बोल रहा है, जिसे तथ्यों का ज्ञान नहीं है, इतिहास का ज्ञान नहीं है, और नियमावली का ज्ञान नहीं है। वह सदन में जो आरोप लगा रहे हैं, उसके लिए उनके पास कोई साक्ष्य नहीं है।”
तिवारी ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री सदन की परंपराओं का सम्मान नहीं कर रहे हैं और वह बिना जाने-समझे बयान दे रहे हैं। इस पर कांग्रेस और विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन से वॉकआउट किया।
तृणमूल सांसद ऋतब्रत बनर्जी ने कहा कि मंत्री सदन को गलत दिशा में ले जा रहे थे और उनका बयान पूरी तरह से भ्रमित करने वाला था। उन्होंने आरोप लगाया कि मंत्री ने जानबूझकर सदन को गुमराह किया और इसका उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ उठाना था। उन्होंने कहा, “यह काला झूठ है। मंत्री ने सदन में जो कुछ कहा, वह पूरी तरह से गलत था। उन्होंने बिना किसी तथ्य के आरोप लगाए और जब हमने तथ्य पूछा तो उनके पास कोई जवाब नहीं था।”
कांग्रेस सांसद दिग्विजय सिंह ने कहा, “हम इस बात पर गहरी आपत्ति जताते हैं कि गृह राज्य मंत्री ने कांग्रेस शासित राज्यों पर आरोप लगाया कि वहां घुसपैठ बढ़ रही है। मंत्री ने यह आरोप बिना किसी साक्ष्य के लगाए। अगर उनका यह दावा सही है, तो एक उदाहरण तो देंगे कि ऐसा कहां हुआ और उसे उन्होंने कैसे निपटाया। हमें ऐसी बातों का विरोध करना चाहिए जो बिना किसी आधार के की जा रही हैं। कांग्रेस पार्टी हमेशा अवैध प्रवासियों के खिलाफ रही है और हमने कभी भी इन मुद्दों पर कोई समझौता नहीं किया।”
तृणमूल की राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने भी नित्यानंद राय के बयान की आलोचना की और कहा, “गृह राज्य मंत्री ने जो बातें की हैं, वे पूरी तरह से झूठी हैं। उन्होंने दावा किया कि घुसपैठी मुख्य रूप से कांग्रेस और तृणमूल शासित राज्यों से आ रहे हैं, लेकिन जब हम उनसे पूछते हैं कि उन्होंने कितने घुसपैठियों को डिपोर्ट किया, तो उनके पास कोई तथ्य नहीं था।”
देव ने यह भी आरोप लगाया कि मंत्री सदन में राजनीतिक भाषण दे रहे थे, जो सदन की परंपराओं के खिलाफ था। उन्होंने कहा, “यह बेहद दुखद है कि सदन में मंत्री झूठ बोल रहे हैं और कोई भी तथ्य पेश नहीं कर रहे हैं।”
राजद के मनोज झा ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जाहिर की और कहा कि मंत्री का यह बयान मंत्री पद की गरिमा को नष्ट करने वाला था। उन्होंने कहा, “एक मंत्री पद की गरिमा होती है, लेकिन आज गृह राज्य मंत्री ने इस गरिमा को तार-तार किया है। वह झूठ बोलने के लिए सदन का इस्तेमाल कर रहे हैं और यह एक बहुत खतरनाक उदाहरण है कि कैसे व्हाट्सएप आधारित जानकारी से संसद की कार्यवाही को प्रभावित किया जा सकता है। हमें इसकी कड़ी निंदा करनी चाहिए।”
तृणमूल सांसद डोला सेन ने भी नित्यानंद राय के आरोपों का विरोध किया और कहा कि गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी है कि वह देश की सीमाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा, “गृह मंत्री और उनका मंत्रालय सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार है, लेकिन जब घुसपैठ होती है तो इसका जिम्मा राज्य सरकारों पर डालना गलत है। केंद्र सरकार को अपनी जिम्मेदारी निभानी चाहिए, न कि राज्य सरकारों पर आरोप लगाना चाहिए।”
राज्यसभा में इस मामले पर तीव्र बहस के बाद विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन से वॉकआउट कर दिया, जिससे सदन में हंगामा हो गया। विपक्ष ने आरोप लगाया कि गृह राज्य मंत्री का बयान गलत और बिना प्रमाण के था। वे यह चाहते थे कि मंत्री अपने आरोपों को साबित करें, लेकिन जब उन्हें कोई स्पष्ट उत्तर नहीं मिला, तो उन्होंने विरोध स्वरूप वॉकआउट किया।
‘इमीग्रेशन एंड फॉरेनर्स बिल, 2025’ चर्चा के बाद राज्यसभा ने पारित कर दिया। लोकसभा इसे पहले ही मंजूरी दे चुकी है। इसके तहत भारत में विदेशियों के आव्रजन और ठहरने के लिए नए नियम लागू किए जाएंगे। विधेयक के तहत अवैध प्रवासियों की पहचान करना और उन्हें निष्कासन की प्रक्रिया से गुजरने के लिए कदम उठाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा, विधेयक में यह भी कहा गया है कि विदेशी नागरिकों के प्रवेश और ठहरने के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
–आईएएनएस
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