वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की विकास दर वित्त वर्ष 27 में 6.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 28 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान: ओईसीडी


नई दिल्ली, 3 जून (आईएएनएस)। वैश्विक अस्थिरता के बीच भारत की विकास दर वित्त वर्ष 27 में 6.3 प्रतिशत और वित्त वर्ष 28 में 6.4 प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह जानकारी ऑर्गेनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कॉरपोरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) की ओर से बुधवार को दी गई।

रिपोर्ट में कहा गया कि चीन की विकास दर में नरमी देखने को मिल सकती है। चीनी अर्थव्यवस्था की विकास दर 2025 में 5 प्रतिशत, 2026 में 4.5 प्रतिशत और 2027 में 4.3 प्रतिशत रह सकती है। इसकी वजह एनर्जी से जुड़ी संवेदनशीलता और रियल एस्टेट सेक्टर का दबाव में रहना है। हालांकि, एनर्जी मिक्स में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ना, पर्याप्त तेल भंडार और पेट्रोल की कीमतों पर कैप, इसके प्रभाव को कुछ हद तक कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, “मध्य पूर्व में चल रहा संघर्ष ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक को प्रभावित करने वाली प्रमुख शक्ति बन गया है। फरवरी से फारस की खाड़ी की अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादित ऊर्जा और अन्य प्रमुख कृषि एवं औद्योगिक उत्पादों की कीमतें आसमान छू रही हैं, क्योंकि उत्पादन और निर्यात में कमी आई है। इससे महंगाई बढ़ रही है, जिससे वास्तविक आय और आर्थिक विकास पर दबाव पड़ रहा है। इसने जीडीपी वृद्धि के अनुमानों को कम कर दिया गया है, जबकि महंगाई के अनुमानों को बढ़ा दिया गया है।”

भारतीय रिजर्व बैंक ने जनवरी 2025 में मौद्रिक नीति दर को 6.5 प्रतिशत से घटाकर फरवरी 2026 में लगभग स्थिर स्तर 5.25 प्रतिशत पर ला दिया, जिससे औसत ऋण दरों में गिरावट आई है।

गैर-खाद्य बैंक ऋण (खाद्य खरीद संबंधी ऋण को छोड़कर शुद्ध बैंक ऋण) में मार्च में वार्षिक आधार पर 15.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

हालांकि, हाल के घटनाक्रम मुद्रास्फीति के दबावों के पुन: उभरने का संकेत देते हैं। अनुकूल आधार प्रभाव के कम होने के कारण खाद्य पदार्थों की बढ़ती कीमतों के चलते मुख्य महंगाई में वृद्धि शुरू हो गई है।

ओईसीडी की रिपोर्ट में कहा गया, ” मुद्रास्फीति को 4 प्रतिशत के लक्ष्य दायरे में बनाए रखने और उम्मीदों को स्थिर करने के लिए वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के अंत तक नीति दर में लगभग 25 आधार अंकों की अस्थायी वृद्धि का अनुमान है।”

इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट में कहा गया कि वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में राजकोषीय घाटे को वित्त वर्ष 2025-26 के सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 प्रतिशत से घटाकर 4.3 प्रतिशत करने का प्रावधान था। हालांकि, ऊर्जा की कीमतों में आए अचानक बदलाव को कम करने के लिए अपनाए गए उपायों से बजट में निर्धारित लक्ष्य की तुलना में घाटे में लगभग 0.4 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है।

–आईएएनएस

एबीएस


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