ईरान के साथ मतभेद के बीच अमेरिकी एयर बेसों पर हलचल तेज, बातचीत जारी रखेंगे दोनों देश


काहिरा, 23 फरवरी (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान ने बातचीत जारी रखने का फैसला किया है। हालांकि, न्यूक्लियर डील और अमेरिका की बड़ी सैन्य तैयारी को लेकर दोनों पक्षों के बिल्कुल अलग-अलग विचार हैं। दोनों देशों के बीच हालात अभी बेहद नाजुक बने हुए हैं।

ओमानी विदेश मंत्री सैय्यद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी ने रविवार को कहा कि अमेरिका-ईरान बातचीत का अगला राउंड गुरुवार को जिनेवा में होगा।

विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा, “यह पुष्टि करते हुए खुशी हो रही है कि अमेरिका-ईरान बातचीत अब इस गुरुवार को जिनेवा में तय है, जिसमें डील को फाइनल करने की दिशा में और आगे बढ़ने की सकारात्मक कोशिश की जाएगी।”

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ ने ईरान की आधिकारिक न्यूज एजेंसी आईआरएनए के हवाले से बताया कि ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची और इंटरनेशनल एटॉमिक एनर्जी एजेंसी (आईएईए) के डायरेक्टर जनरल राफेल ग्रॉसी ने रविवार को फोन पर बातचीत की। इस बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने एक सस्टेनेबल न्यूक्लियर एग्रीमेंट हासिल करने के लिए “कंस्ट्रक्टिव एंगेजमेंट और बातचीत का रास्ता अपनाने” के महत्व पर जोर दिया।

इससे पहले शुक्रवार को अमेरिकी मीडिया आउटलेट एमएसएनबीसी के साथ एक इंटरव्यू में अराघची ने कहा था कि तेहरान दो से तीन दिनों के अंदर अमेरिका के साथ एक संभावित न्यूक्लियर डील का ड्राफ्ट तैयार करेगा और इसे अमेरिकी डेलीगेशन को सौंपेगा।

सीबीएस न्यूज के एक इंटरव्यू में अराघची ने बातचीत के जरिए वॉशिंगटन के साथ अपने मतभेदों को सुलझाने की तेहरान की इच्छा दोहराई।

अराघची ने कहा कि वह गुरुवार को जिनेवा में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के खास दूत स्टीव विटकॉफ से मिल सकते हैं। उन्होंने संकेत दिया कि ईरान और अमेरिका के बीच अभी भी डिप्लोमैटिक हल निकालना मुमकिन है।

उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष एक संभावित डील के हिस्सों पर काम कर रहे हैं और गुरुवार को डील के शुरुआती ड्राफ्ट पर चर्चा कर सकते हैं।

अराघची ने कहा कि डील में ईरान का शांतिपूर्ण न्यूक्लियर प्रोग्राम शामिल होना चाहिए और साथ ही ईरान के खिलाफ अमेरिका के बैन हटाए जाने चाहिए, जिससे तेहरान के नेशनल न्यूक्लियर प्रोग्राम के तहत यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार को सुरक्षित रखने के इरादे को सुनिश्चित किया जा सके।

उन्होंने कहा कि ईरान और अमेरिका 2015 में तेहरान और दुनिया की ताकतों के बीच हस्ताक्षर किए गए न्यूक्लियर डील से बेहतर परमाणु समझौता कर सकते हैं। ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि पिछली बातचीत में शामिल पार्टियों ने बहुत विस्तार में बात की थी।

इस बार इतनी डिटेल्स की जरूरत नहीं है और हम आधारभूत चीजों पर सहमत हो सकते हैं और यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम शांतिपूर्ण हो और हमेशा शांतिपूर्ण रहे और साथ ही और बैन हटाए जाएंगे।

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो तेहरान को अपनी रक्षा करने का अधिकार है। हमें आप जानते हैं, इस इलाके में अमेरिकी बेस पर हमला करना होगा।”

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा, “ईरान इस इलाके में शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है। हाल की बातचीत में व्यवहारिक प्रस्ताव का लेन-देन हुआ और इससे अच्छे संकेत मिले, हालांकि हम अमेरिका के एक्शन पर करीब से नजर रख रहे हैं और किसी भी संभावित स्थिति के लिए सभी जरूरी तैयारी कर ली है।”

ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिना नाम बताए कहा, “दोनों पक्षों को प्रतिबंध हटाने के लिए एक लॉजिकल टाइमटेबल पर पहुंचने की जरूरत है।”

वॉशिंगटन ने कहा है कि ईरान के साथ किसी भी समझौते में यूरेनियम संवर्धन पर बैन, उसके समृद्ध तत्वों को हटाना, लंबी दूरी की मिसाइलों पर लिमिट और रीजनल प्रॉक्सी के लिए समर्थन वापस लेना शामिल होना चाहिए, लेकिन विश्लेषक ने कहा है कि ईरान के लिए ऐसी शर्तें मानना ​​बहुत मुश्किल होगा।

मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि अमेरिका ने हाल ही में जॉर्डन के मुवफ्फाक साल्टी एयर बेस पर बड़ी संख्या में फाइटर जेट और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट तैनात किए हैं, जो बेस की आम तैनाती के मुकाबले काफी ज्यादा है।

जॉर्डन की राजधानी अम्मान से करीब 100 किलोमीटर नॉर्थ-ईस्ट में मौजूद मुवफ्फाक साल्टी को मिडिल ईस्ट में अमेरिका के मुख्य सैन्य बेस में से एक माना जाता है। इस इलाके के दूसरे अमेरिकी सैन्य बेस पर भी बड़ी संख्या में सैन्य तैनाती की खबरें आई हैं।

दोनों पक्षों के बीच दो राउंड की इनडायरेक्ट न्यूक्लियर बातचीत हो चुकी है। पहली बातचीत 6 फरवरी को मस्कट में और दूसरी 17 फरवरी को जिनेवा में हुई थी।

–आईएएनएस

केके/वीसी


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