अमेरिका ने तिब्बती नेता पेन्पा त्सेरिंग को दी बधाई, सीटीए के साथ सहयोग जारी रखने की जताई प्रतिबद्धता


वाशिंगटन, 28 मई (आईएएनएस)। अमेरिका ने केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) के लोकतांत्रिक चुनावों और उसके नए कार्यकाल के लिए बधाई दी है।

अमेरिकी विदेश विभाग के लोकतंत्र, मानवाधिकार और श्रम मामलों के सहायक सचिव राइली बार्न्स ने पेन्पा त्सेरिंग को दोबारा सिकीओंग (सीटीए अध्यक्ष) चुने जाने पर बधाई दी।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “केंद्रीय तिब्बती प्रशासन (सीटीए) और दुनिया भर में रह रहे तिब्बती लोगों और पेन्पा त्सेरिंग को चुनाव जीतने की बधाई। अमेरिका तिब्बती नेतृत्व के साथ लोकतांत्रिक तरीके से चुने गए प्रतिनिधियों के साथ जुड़ा रहेगा और दुनिया भर के तिब्बतियों के लिए काम करता रहेगा।”

पेन्पा त्सेरिंग ने बुधवार को सीटीए के सिक्योंग के तौर पर अपने दूसरे पंच वर्षीय कार्यकाल की शपथ ली। ये समारोह बेहद खास था। शपथ ग्रहण समारोह में 90 वर्ष के तिब्बती आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा भी मौजूद थे। समारोह हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में संपन्न हुआ।

शपथ ग्रहण समारोह को तिब्बती समुदाय के लिए केवल औपचारिक नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

अपने संबोधन में त्सेरिंग ने कहा कि वो धर्म गुरु दलाई लामा के दिशा-निर्देश में, उनके विचारों के तहत आगे बढ़ने को तैयार हैं।

उन्होंने कहा, “काशाग (मंत्रिमंडल) राजनीतिक और सामाजिक कल्याण से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ाते हुए तिब्बत संघर्ष की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करने पर काम करेगा, ताकि तिब्बत-चीन विवाद का एक न्यायपूर्ण समाधान हासिल किया जा सके।”

अपने बयान में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में चीन की नीतियों को देखते हुए बातचीत की संभावनाएं सीमित दिखाई देती हैं। इसके बावजूद तिब्बती नेतृत्व अहिंसा और संवाद पर आधारित “मिडल-वे पॉलिसी” के प्रति समर्पित है।

यह नीति, जिसे तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा ने आगे बढ़ाया है, तिब्बत-चीन विवाद का समाधान आपसी समझ, संवाद और अहिंसा के आधार पर करने की बात करती है।

त्सेरिंग ने कहा कि जब तक कोई समाधान नहीं निकलता, तब तक तिब्बती प्रशासन चीन सरकार के साथ सीमित और सतर्क बैकचैनल संवाद जारी रखेगा। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर “मिडल-वे पॉलिसी” के लिए समर्थन और मान्यता बढ़ाने के प्रयास भी जारी रहेंगे।

उनके अनुसार, यह रणनीति तिब्बत के हितों की रक्षा और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक संतुलित और व्यावहारिक रास्ता है।

शपथ ग्रहण समारोह से पहले, वरिष्ठ बौद्ध भिक्षुओं ने अपना कार्यकाल समाप्त करने वाले 16वीं काशाग के सदस्यों से मुलाकात की।

–आईएएनएस

केआर/


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