मंगोलिया के राष्ट्रीय पर्व 'नादम 2026' में भारत की भागीदारी, राजदूत अतुल मल्हारी ने दी शुभकामनाएं


उलानबतर, 10 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के मंगोलिया में राजदूत अतुल मल्हारी ने शुक्रवार को मंगोलिया के राष्ट्रीय पर्व ‘नादम 2026’ के मौके पर सरकार की ओर से सुखबातार स्क्वायर में आयोजित कार्यक्रमों में हिस्सा लिया।

मंगोलिया में भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए कहा, “10 जुलाई को भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे ने राजनयिक समुदाय के सदस्य के रूप में मंगोलिया सरकार की ओर से ‘नादम 2026’ के अवसर पर सुखबातार स्क्वायर में आयोजित कई कार्यक्रमों में भाग लिया। इनमें ध्वजारोहण समारोह, सैन्य परेड, डी. सुखबातार की प्रतिमा और चंगेज खान की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित करना शामिल था।”

इन कार्यक्रमों में मंगोलिया के राष्ट्रपति उखनागिन खुरेलसुख, प्रधानमंत्री न्याम-ओसोरिन उचराल, संसद के स्पीकर, कई मंत्री, सांसद और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद रहे।

भारतीय दूतावास ने इस मौके पर मंगोलिया के लोगों को ‘नादम 2026’ की शुभकामनाएं भी दीं।

दूतावास ने ‘एक्स’ पर लिखा, “नादम 2026 के अवसर पर सभी मंगोलियाई नागरिकों को हार्दिक शुभकामनाएं। यह मंगोलिया का राष्ट्रीय पर्व है, जो देश की स्थापना, एकता, आजादी और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है।”

पिछले सप्ताह मंगोलिया के पूर्व राष्ट्रपति नंबारिन एनखबयार ने भारत के सहयोग से बन रही डोर्नोगोवी ऑयल रिफाइनरी परियोजना की प्रगति की सराहना की।

मंगोल ऑयल रिफाइनरी परियोजना भारत सरकार की ओर से दिए गए 1.7 अरब अमेरिकी डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) के सहयोग से बनाई जा रही है। यह मंगोलिया की ऊर्जा सुरक्षा और लंबे समय तक टिकाऊ ऊर्जा उपलब्ध कराने की दिशा में एक अहम और बड़ी परियोजना मानी जाती है।

भारतीय दूतावास ने ‘एक्स’ पर बताया, “4 जुलाई 2026 को भारत के राजदूत अतुल मल्हारी गोत्सुर्वे ने मंगोलिया के पूर्व (तीसरे) राष्ट्रपति एचई एन. एनखबयार के साथ डोर्नोगोवी स्थित ऑयल रिफाइनरी परियोजना के निर्माण स्थल का दौरा किया। उन्होंने ‘इंजीनियर्स इंडिया’, ‘मेघा इंजीनियरिंग एंड इंफ्रास्ट्रक्चर्स लिमिटेड’ और ‘मंगोल रिफाइनरी’ के इंजीनियरों और कर्मचारियों से मुलाकात की। इस दौरान एनखबयार ने परियोजना के निर्माण कार्य की प्रगति की सराहना की और कहा कि यह बड़ी परियोजना भारत और मंगोलिया के रिश्तों को मजबूत करेगी तथा मंगोलिया को लंबे समय तक स्थिर ऊर्जा आपूर्ति सुनिश्चित करने में मदद करेगी।”

–आईएएनएस

एवाई/एबीएम


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