अविमुक्तेश्वरानंद प्रकरण को लेकर अखिलेश यादव का सरकार पर निशाना, चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर भी सवाल

लखनऊ, 24 जनवरी (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम को लेकर यूपी सरकार पर निशाना साधा।
अखिलेश यादव ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा, “कालनेमि को याद करने वाले बताएं कि कलयुग के कालनेमि कौन हैं। कालनेमि काल बनकर आता है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार धार्मिक मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल कर रही है। अखिलेश यादव ने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एसआईआर के तहत जिन लोगों को नोटिस दिए जा रहे हैं, उसकी जानकारी राजनीतिक दलों को क्यों नहीं दी जा रही है? चुनाव आयोग निष्पक्ष नहीं है और सरकार के साथ मिलकर काम कर रहा है। अधिकारी सरकार से मिलकर चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ी कर रहे हैं।
सपा प्रमुख ने कहा कि उन्हें भरोसा दिलाया गया था कि एसआईआर के बाद मतदाता सूची में कोई भी नाम नहीं छूटेगा, लेकिन उपचुनाव के दौरान स्थिति कुछ और ही देखने को मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि उपचुनाव में वोट लूटे गए थे और सीसीटीवी फुटेज मौजूद होने के बावजूद चुनाव आयोग ने स्पष्ट कर दिया था कि फुटेज किसी भी राजनीतिक दल को नहीं दी जाएगी।
अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईआर के माध्यम से कई तरह की साजिशें की जा रही हैं। उन्होंने बूथ लेवल ऑफिसर्स (बीएलओ) की ट्रेनिंग पर सवाल उठाते हुए कहा कि जिस तरह से प्रशिक्षण दिया गया, उसमें कई बीएलओ की जान चली गई, लेकिन इस पर कोई जवाबदेही तय नहीं की गई।
उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में एक ही नाम से दो-दो वोट बनाए जा रहे हैं और डुप्लीकेट डाटा डाला जा रहा है। अखिलेश ने कन्नौज सदर विधानसभा सीट का हवाला देते हुए दावा किया कि वहां करीब 200 फर्जी मतदाता पाए गए हैं।
सपा प्रमुख ने मांग की कि चुनाव आयोग राजनीतिक दलों का सहयोग करे और पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी बनाया जाए। उन्होंने आधार से मतदाता सूची को जोड़ने और डुप्लीकेट वोटरों पर रोक लगाने की मांग भी दोहराई।
अखिलेश यादव ने कहा कि एसआईएआर को लेकर जनता में भ्रम फैलाया जा रहा है और यह प्रक्रिया एसआईआर कम, एनआरसी जैसी ज्यादा प्रतीत हो रही है, जिसमें लोगों से अपनी नागरिकता साबित करने की स्थिति पैदा हो रही है।
शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने कहा कि समाजवादी पार्टी का उनसे लगातार संपर्क बना हुआ है और उनसे बातचीत हो रही है। वे असली सनातनी हैं और सरकार को इस पूरे मामले में संयम और संवेदनशीलता से काम लेना चाहिए।
अखिलेश यादव ने जातिगत जनगणना का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि जाति के आधार पर जनगणना की बात तो की जा रही है, लेकिन सभी जातियों की सही और पूर्ण गणना नहीं कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि उनके घर की पहली रोटी गाय को दी जाती है।
उन्होंने दावा किया कि कन्नौज में देश का पहला काऊ मिल्क प्लांट समाजवादी पार्टी सरकार के दौरान लगाया गया था, जिसे मौजूदा सरकार ने बंद कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान सरकार गाय और गौ-सेवा के मुद्दे पर केवल दिखावा कर रही है। उन्होंने कहा कि सपा सरकार बनने पर गाय का दूध खरीदा जाएगा और जनता में वितरित किया जाएगा।
अखिलेश यादव ने नोएडा में हुई हालिया सड़क दुर्घटना का जिक्र करते हुए कहा कि डायल-100 जैसी आपातकालीन सेवा को कमजोर कर दिया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि जब ऐसी सेवाओं को बर्बाद किया जाएगा, तो इस तरह की घटनाएं होंगी। उन्होंने मांग की कि इस मामले में सबसे पहले बड़े अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए, क्योंकि एक पिता के सामने उसके बेटे की जान चली गई।
इसके अलावा, अखिलेश यादव ने कोविड टीकाकरण के बाद स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ा मुद्दा उठाते हुए कहा कि वैक्सीन लगने के बाद होने वाली मौतों और बीमारियों के आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए और इस पर व्यापक अध्ययन होना चाहिए। केजीएमयू से मजार हटाने के सवाल पर कहा कि सरकार को केजीएमयू भी हटवा देना चाहिए, क्योंकि इसे क्रिश्चियन ने बनाया था।
–आईएएनएस
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