'एयरलिफ्ट' को 10 साल पूरे: ऐसी फिल्म जिसने याद दिलाया वो इतिहास, जिसे हम भूल गए थे


मुंबई, 22 जनवरी (आईएएनएस)। हिंदी सिनेमा में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं जो सिर्फ मनोरंजन नहीं करतीं, बल्कि समय के साथ इतिहास की याद दिलाने का काम भी करती हैं। अक्षय कुमार और निमरत कौर अभिनीत फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ को रिलीज हुए अब पूरे दस साल हो चुके हैं।

इस खास मौके पर अभिनेत्री निमरत कौर ने सोशल मीडिया के जरिए फिल्म से जुड़ी अपनी यादों को साझा किया और एक बार फिर इस ऐतिहासिक फिल्म को चर्चा में ला दिया।

निमरत ने फिल्म के सेट की कई पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए लिखा, ”10 साल पहले आज के दिन यह सेलुलॉइड मैजिक हुआ था। संगीत, यादगार लम्हे और प्यार… सब कुछ समय के साथ और बढ़ता ही गया है।”

उनके इस पोस्ट में उस दौर की याद भी थी, जिसे ‘एयरलिफ्ट’ ने बड़े पर्दे पर जीवंत किया था।

फिल्म ‘एयरलिफ्ट’ साल 1990 की उस सच्ची घटना पर आधारित है, जब सद्दाम हुसैन की अगुवाई वाले इराक ने पड़ोसी देश कुवैत पर हमला कर दिया था। इस युद्ध के कारण कुवैत में रह रहे करीब एक लाख सत्तर हजार भारतीय नागरिक जंग के बीच फंस गए थे। हालात इतने खराब थे कि जान-माल की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती बन गई थी।

ऐसे समय में भारत सरकार, एयर इंडिया और भारतीय सेना के सहयोग से एक विशाल निकासी अभियान चलाया गया। यह मिशन 59 दिनों तक चला और इसे दुनिया का अब तक का सबसे बड़ा मानवीय बचाव अभियान माना गया, जो गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी दर्ज है।

‘एयरलिफ्ट’ इसी ऐतिहासिक घटना को आम दर्शकों तक पहुंचाने की कोशिश करती है।

फिल्म की कहानी रंजीत कात्याल नाम के एक भारतीय मूल के कारोबारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका किरदार अक्षय कुमार ने निभाया है। रंजीत कुवैत में रहता है और वहीं की सुख-सुविधाओं में रमा हुआ है। उसकी पत्नी अमृता कात्याल और एक छोटी बेटी है। शुरुआत में रंजीत का भारत या कुवैत में फंसे भारतीयों से कोई खास भावनात्मक जुड़ाव नहीं दिखता, लेकिन युद्ध के हालात और आसपास घटती हिंसक घटनाएं उसकी सोच बदल देती हैं।

अपने ड्राइवर की मौत के बाद वह भीतर से टूट जाता है और फिर भारतीयों के दुखों को समझते हुए उन्हें सुरक्षित निकालने की मुहिम में जुट जाता है। फिल्म इसी बदलाव और संघर्ष की कहानी को सामने रखती है।

–आईएएनएस

पीके/वीसी


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