एआई से पुराने सॉफ्टवेयर सिस्टम को खतरा, आईबीएम सबसे ज्यादा प्रभावित

मुंबई, 24 फरवरी (आईएएनएस)। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के कारण कंपनी के एक स्थिर कारोबार पर असर पड़ने की आशंका के चलते आईबीएम के शेयरों में 25 साल से ज्यादा समय में सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट दर्ज की गई।
कंपनी का शेयर 13.2 प्रतिशत गिरकर 223.35 डॉलर पर बंद हुआ। यह 18 अक्टूबर 2000 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की गिरावट है।
इस साल अब तक आईबीएम के शेयर करीब 25 प्रतिशत गिर चुके हैं, क्योंकि निवेशक इस बात पर दोबारा विचार कर रहे हैं कि एआई एंटरप्राइज सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं के बिजनेस मॉडल को कितनी तेजी से बदल सकता है।
यह गिरावट एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक के एक ब्लॉग पोस्ट के बाद आई। कंपनी ने दावा किया कि उसका एआई टूल ‘क्लॉड कोड’ कोबोल (सीओबीओएल) भाषा को समझ सकता है और उसे आधुनिक बना सकता है। कोबोल एक प्रोग्रामिंग भाषा है, जिसे 1950 के दशक में बनाया गया था और आज भी दुनिया के कई महत्वपूर्ण कंप्यूटर सिस्टम इसी पर चलते हैं।
कोबोल आज भी बैंकों, एयरलाइंस, बीमा कंपनियों और सरकारी विभागों में व्यापक रूप से इस्तेमाल होती है। यह आईबीएम के मेनफ्रेम कारोबार में भी अहम भूमिका निभाती है।
कई दशकों से कोबोल सिस्टम को अपडेट करना धीमा, महंगा और बड़ी कंसल्टेंट टीमों पर निर्भर रहा है।
इसी काम से आईबीएम को लगातार आय होती रही है, क्योंकि कई कंपनियां पुराने सिस्टम को बनाए रखने या अपग्रेड करने में कठिनाई महसूस करती हैं, जिन्हें अब बहुत कम इंजीनियर पूरी तरह समझते हैं।
एंथ्रोपिक का कहना है कि एआई इस स्थिति को बदल सकता है, क्योंकि इससे पुराने कोड का विश्लेषण और अपडेट करना काफी आसान हो जाता है।
ब्लॉग पोस्ट में एंथ्रोपिक ने कहा कि आज भी लाइव सिस्टम में सैकड़ों अरब लाइनों का कोबोल कोड चल रहा है, जबकि इस भाषा को जानने वाले लोगों की संख्या लगातार घट रही है।
कंपनी ने यह भी कहा कि एआई जटिल और समय लेने वाले कार्यों को बेहतर तरीके से संभाल सकता है, जिनकी वजह से कोबोल सिस्टम का आधुनिकीकरण पहले बहुत महंगा पड़ता था।
एंथ्रोपिक के अनुमान के अनुसार, अमेरिका में लगभग 95 प्रतिशत एटीएम लेनदेन आज भी कोबोल पर निर्भर हैं, जो दर्शाता है कि यह भाषा वित्तीय ढांचे में कितनी गहराई से जुड़ी हुई है।
कंपनी का दावा है कि उसका एआई बड़े कोडबेस को स्कैन कर सकता है, सॉफ्टवेयर के विभिन्न हिस्सों के बीच निर्भरता को समझ सकता है, ऐसे सिस्टम के लिए स्पष्ट डॉक्यूमेंटेशन तैयार कर सकता है जिन्हें अब ठीक से समझा नहीं जाता, और संभावित जोखिमों की पहचान कर सकता है, जिनका पता लगाने में सामान्यतः महीनों लग जाते हैं।
एंथ्रोपिक ने कहा, “आधुनिकीकरण कई वर्षों से अटका हुआ है, क्योंकि पुराने कोड को समझने की लागत अक्सर उसे दोबारा लिखने से भी ज्यादा होती है। एआई इस समीकरण को बदल देता है।”
–आईएएनएस
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