वेनेजुएला पर कार्रवाई के बाद क्या रूस-यूक्रेन में सुलह का रास्ता ट्रंप के लिए होगा मुश्किल?


नई दिल्ली, 6 जनवरी (आईएएनएस)। एक तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कई देशों में युद्ध रुकवाने और नोबेल शांति पुरस्कार पर दावेदारी कर रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर 2026 में साल की शुरुआत के साथ ही वेनेजुएला पर हमला कर उसके राष्ट्रपति को उनकी पत्नी सहित अपहरण कर अमेरिका ले आते हैं। इन सब के बीच बड़ा सवाल ये है कि रूस और यूक्रेन के बीच एक दिन में युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले ट्रंप के लिए अब कितनी परेशानी आने वाली है।

इस संबंध में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) जॉन बोल्टन ने आईएएनएस से खास बातचीत की।

ट्रंप के लिए रूस और यूक्रेन के बीच युद्ध रोकना कितना मुश्किल होगा? इसे लेकर पूर्व एनएसए जॉन बोल्टन ने कहा, “मुझे लगता है कि यूक्रेन में रूस ने ट्रंप का बहुत अच्छे से साथ दिया। मुझे लगता है कि ऐसा कोई समझौता होने की उम्मीद कम है, जो यूक्रेन के लोगों को मंजूर हो। मेरा अंदाजा है कि, जैसा कि उन्होंने पिछले साल अलग-अलग समय पर किया है, ट्रंप रूस और यूक्रेन के बीच डील करने की कोशिश से पीछे हट जाएंगे। वह असल में नोबेल शांति पुरस्कार चाहते हैं और रूस-यूक्रेन के बीच डील के लिए उन्हें यह जल्द नहीं मिलने वाला है क्योंकि दोनों पार्टियां बहुत दूर हैं।”

उन्होंने कहा कि वेनेजुएला के खिलाफ अपनी कार्रवाई से अमेरिका ने दुनिया को मैसेज दिया कि ट्रंप ने लंबे समय से जुल्म के शिकार लोगों को आजादी दिलाई है।

पूर्व अमेरिकी एनएसए ने कहा, “मादुरो के मामले में, उम्मीद थी, असलियत यह होनी चाहिए कि हम रूस, चीन और ईरान जैसे बाहरी लोगों से पैदा होने वाले खतरों को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं और क्यूबा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं, जो एक और खतरा है, जिसके लिए मादुरो सरकार ने वेनेजुएला को एक ऑपरेटिंग बेस के तौर पर इस्तेमाल करने दिया और क्योंकि वेनेजुएला के लोगों पर इस सरकार ने बहुत लंबे समय से जुल्म किया है। यही मैसेज हमें भेजना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा, “रूस इस हेमिस्फेयर में अपनी गतिविधि के लिए वेनेजुएला को एक ऑपरेटिंग बेस के तौर पर इस्तेमाल करता है, जिसे वह क्यूबा से ज्यादा सुरक्षित मानता है, क्योंकि क्यूबा अभी भी फ्लोरिडा से सिर्फ 90 मील दूर है और वेनेजुएला और भी दूर है। क्यूबा, ​​जो अभी भी रूस के बहुत ज्यादा फायदे में है, अपनी सरकार को चलाने और सत्ता में बनाए रखने के लिए वेनेजुएला के सस्ते तेल पर निर्भर है। रूस भी चाहता है कि यह जारी रहे। यह मंजूर नहीं है। चीन वेनेजुएला के तेल तक ज्यादा पहुंच बनाने की कोशिश कर रहा है।”

जॉन बोल्टन ने आगे कहा, “अभी वे वेनेजुएला के तेल एक्सपोर्ट का लगभग 80 फीसदी खरीदते हैं। मुझे लगता है कि वे तेल के इंफ्रास्ट्रक्चर में खुद को बहुत ज्यादा शामिल करने पर विचार करेंगे क्योंकि वेनेजुएला के तेल रिजर्व दुनिया में सबसे बड़े हैं, सऊदी अरब से भी बड़े। ईरान का दुनिया में सबसे बड़ा दूतावास काराकस में है ताकि पश्चिम देशों में हिज्बुल्लाह की गतिविधि पर नजर रखी जा सके। वेनेजुएला के आर्थिक सिस्टम के जरिए गैर-कानूनी तेल बिक्री से वेनेजुएला के मुनाफे को सफेद करने में मदद मिल सके और वेनेजुएला के यूरेनियम रिजर्व पर नजर रखी जा सके, जो दुनिया में सबसे बड़े रिजर्व में से हैं। पश्चिमी गोलार्ध के मामले में यह सब बहुत परेशान करने वाला है, दूसरे देशों के लिए अस्थिरता पैदा करने वाला है और अमेरिका के लिए खतरा है।”

–आईएएनएस

केके/एबीएम


Show More
Back to top button