यूजीसी पर बोले आचार्य प्रमोद कृष्णम, समाज को विभाजित करने वाला फैसला देश के लिए ठीक नहीं

हापुड़, 28 जनवरी (आईएएनएस)। देशभर में जनरल कैटेगरी के छात्रों और सवर्ण जाति के लोगों का यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन (यूजीसी) के नए नियमों को लेकर विरोध तेज हो गया है।
आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह समाज को विभाजित करने वाला फैसला देश के लिए ठीक नहीं है।
यूजीसी के नए नियम पर हापुड़ में आचार्य प्रमोद कृष्णम ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि कहीं न कहीं कोई ऐसा फैसला जो समाज को विभाजित करता हो, वह उचित नहीं है और देश के लिए ठीक नहीं है। भारत इस समय विश्वगुरु बनने की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अगर हम जातियों या वर्गों के नाम पर समाज को खंड-खंड करेंगे, तो यह उचित नहीं होगा। मैंने नए नियम को अभी पढ़ा नहीं है। पढ़ने के बाद मैं विस्तार से अपनी बात रख सकता हूं।
उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद विवाद पर कहा कि स्थानीय पुलिस को संयम बरतना चाहिए था। लोग मानते हैं कि सनातन की सरकार में संतों के प्रति सम्मान होना चाहिए। साथ ही, शंकराचार्य को भी संयम रखना चाहिए।
यूजीसी के नए नियम पर जगद्गुरु स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह पूरी तरह गलत और अन्यायपूर्ण है। देश में समान शिक्षा नीति होनी चाहिए, और समानता केवल समान शिक्षा नीति से ही आएगी। यूजीसी के इन नियमों को लागू करके जातिगत आधार पर झगड़े की शुरुआत की गई है।
उन्होंने कहा कि इस नए नियम में एक चीज काफी परेशान करने वाली है। अगर कोई किसी पर झूठी शिकायत भी दर्ज करा दे तो उस पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, इसीलिए सभी के लिए सामान्य शिक्षा नीति होनी चाहिए। आज का युवा उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद भी बेरोजगार है। नीति ऐसी बननी चाहिए कि उसे रोजगार मिले और वह आत्मनिर्भर बन सके। यूजीसी के नए नियम देशहित और मानवता के हित में नहीं हैं। इसे तत्काल प्रतिबंधित किया जाना चाहिए।
–आईएएनएस
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