गृह निर्माण प्रौद्योगिकियां भारत के भव्य भवनों को आकार देंगी


नई दिल्ली, 24 नवंबर (आईएएनएस)। वर्ष 2047 में जब भारत अपनी आजादी के 100 साल मनाएगा तब नई गृह निर्माण प्रौद्योगिकियां भारत के भव्य भवनों को आकार देंगी। दरअसल, केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (सीबीआरआई) ने विश्व स्तरीय और अत्याधुनिक भवन निर्माण प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं। यह प्रौद्योगिकियां न केवल मजबूत व जलवायु और सूखे के अनुकूल हैं बल्कि वैश्विक पर्यावरण मानदंडों के अनुरूप भी हैं।

शुक्रवार को यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में आयोजित सीएसआईआर-सीबीआरआई प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मेले में दी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सीएसआईआर-सीबीआरआई ने एक स्लॉट में 75 भवन और निर्माण प्रौद्योगिकियों का प्रदर्शन किया। उन्हें उद्योगों को हस्तांतरित कर दिया। आने वाले दिनों में उद्योगों को सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती भवन निर्माण के लिए ऐसी 108 प्रौद्योगिकियां उपलब्ध कराई जाएंगी।

सीबीआरआई ने फोल्डेबल साल्ट शेल्टर विकसित किया है। यह मौसम और आग प्रतिरोधी है। जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह उल्लेखनीय उपलब्धि सीएसआईआर-सीबीआरआई, रूडकी के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के समर्पण और विशेषज्ञता का प्रमाण है। इन प्रौद्योगिकियों में मनुष्यों की जीवन स्थितियों को बदलने, स्थिरता बढ़ाने और लोगों की समग्र भलाई में सुधार करने की शक्ति है।

सिंह ने कहा कि आवास क्षेत्र में आज हम जिन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं, वे बहुआयामी हैं, जिनमें सामर्थ्य और स्थिरता से लेकर आपदा लचीलापन और ऊर्जा दक्षता तक शामिल हैं। हालांकि, आज हमारे पास जो विशेषज्ञता और ज्ञान है, उससे मुझे विश्वास है कि हम देश में इन चुनौतियों से निपट सकते हैं और ऐसे भविष्य का निर्माण कर सकते हैं जहां हर व्यक्ति को सुरक्षित और आरामदायक आवास की सुविधा उपलब्ध हो।

डीएसआईआर के सचिव एवं सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. एन. कलैसेल्वी ने कुछ उल्लेखनीय प्रौद्योगिकियां के बारे में बताया, जिनमें अंडर-रीम्ड पाइल्स, अपशिष्ट से धन, पूर्व फैब्रीकेटेड आवास, अग्नि सुरक्षा, पेड़ों के बिना लकड़ी, सुरक्षात्मक कोटिंग्स स्थानांतरित की जा रही प्रौद्यगिकी हैं।

जितेंद्र सिंह ने टेक्नोलॉजी कम्पेंडियम भी जारी किया, जो दो खंडों में विभिन्न टिकाऊ और किफायती प्रौद्योगिकियों के लिए एक व्यापक मार्गदर्शिका है, जिसमें भवन निर्माण विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में स्वदेशी तरीके से विकसित वर्तमान उन्नत प्रौद्योगिकियों के साथ-साथ समय-सिद्ध प्रौद्योगिकियों को शामिल किया गया है।

–आईएएनएस

जीसीबी/एबीएम


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