पाकिस्तान-ईरान से एक ही दिन में 2,292 अफगान नागरिक अपने देश लौटे

काबुल, 6 अगस्त (आईएएनएस)। पाकिस्तान और ईरान से एक ही दिन में 460 अफगान परिवारों के कुल 2,292 सदस्य अफगानिस्तान लौटे हैं। यह जानकारी तालिबान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने गुरुवार को दी।
तालिबान के उप-प्रवक्ता हमदुल्लाह फितरत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर हाई कमीशन फॉर एड्रेसिंग रिटर्नीज इश्यूज की दैनिक रिपोर्ट साझा करते हुए बताया कि टोरखम सीमा के रास्ते 372 परिवारों के 1,947 सदस्य अफगानिस्तान लौटे। वहीं स्पिन बोल्डक सीमा से 17 परिवारों के 85 लोग और निमरोज प्रांत के सिल्क ब्रिज क्रॉसिंग से 66 परिवारों के 239 सदस्य अपने देश पहुंचे।
रिपोर्ट के मुताबिक, इस्लाम काला सीमा के जरिए भी पांच परिवारों के 21 सदस्य अफगानिस्तान लौटे।
फितरत ने बताया कि लौटे हुए 398 परिवारों के 2,213 लोगों को अफगानिस्तान के विभिन्न प्रांतों में पुनर्वासित किया गया। इसके अलावा 466 परिवारों को वित्तीय सहायता प्रदान की गई, जबकि 395 सिम कार्ड भी वितरित किए गए।
इस बीच, 20 जून को एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अफगान शरणार्थियों के गैरकानूनी निष्कासन पर रोक लगाने और अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के अनुरूप उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की थी।
मानवाधिकार संगठन ने कहा था कि मेजबान देशों में अफगान शरणार्थियों को मनमानी गिरफ्तारियों और परिवारों से अलग किए जाने जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। वहीं अफगानिस्तान लौटने के बाद भी वे मानवाधिकार उल्लंघनों और गंभीर मानवीय संकट से जूझ रहे हैं।
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने एक्स पर कहा था, “दुनियाभर से लाखों अफगान शरणार्थियों को निकाला जा रहा है और यह संख्या लगातार बढ़ रही है। मेजबान देशों में उन्हें मनमानी गिरफ्तारियों और परिवारों के बिछड़ने का सामना करना पड़ रहा है, जबकि वापसी के बाद वे गंभीर मानवीय संकट और मानवाधिकार उल्लंघनों से जूझ रहे हैं।”
संगठन ने कहा कि अफगान नागरिकों के गैरकानूनी निष्कासन को तुरंत रोका जाना चाहिए और अंतरराष्ट्रीय संरक्षण की आवश्यकता वाले लोगों की सुरक्षा अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार कानून के तहत सुनिश्चित की जानी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) और अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (आईओएम) भी कई बार कह चुके हैं कि अफगान शरणार्थियों की वापसी सुरक्षित, स्वैच्छिक और सम्मानजनक तरीके से कराई जानी चाहिए तथा लौटने वालों के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाया जाना चाहिए।
–आईएएनएस
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