तरंग शक्ति 2.0 : 'ऑपरेशन सिंदूर' के बाद वायुसेना का सबसे बड़ा मल्टी नेशनल अभ्यास, जोधपुर में गरजेंगे दुनिया के घातक जेट

नई दिल्ली, 4 अगस्त (आईएएनएस)। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के बाद से ही दुनिया भर की मित्र देशों की वायुसेना भारत के साथ वायु सैन्य अभ्यास की इच्छुक है। वजह है जिस तरह से भारतीय वायुसेना ने सटीक स्ट्राइक के जरिए पाकिस्तानी मेन लैंड पर आतंकी हेड क्वार्टरों को जमींदोज किया, वो भी बिना किसी कोलेटरल डैमेज के, इसी की बारीकी और तकनीक को समझने के मकसद से इंडियन एयरफोर्स के साथ अभ्यास करने की एक लंबी फेहरिस्त तैयार है। अलगे 2 महीने तक भारतीय वायुसेना का एक्सरसाइज कैलेंडर पूरी तरह से पैक है।
भारतीय वायुसेना के चार राफेल फाइटर जेट , दो सी-17 ग्लोबमास्टर और 100 से ज्यादा वायुसैनिक इस समय ऑस्ट्रेलिया में आयोजित मल्टी नेशनल वायु सैन्य अभ्यास पिच ब्लैक में हिस्सा ले रहे हैं। 20 जुलाई से शुरू हुआ यह अभ्यास 7 अगस्त तक चलेगा, जिसमें 19 देशों की वायुसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।
इस अभ्यास के खत्म होते ही भारतीय वायुसेना की यही टीम अगस्त के पहले सप्ताह में रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के साथ संयुक्त अभ्यास उदारा शक्ति में हिस्सा लेगी। एक हफ्ते तक चलने वाले इस अभ्यास में दोनों देशों की वायुसेनाएं एक-दूसरे के साथ अपने ऑपरेशनल अनुभव और युद्ध कौशल साझा करेंगी। इसमें भारतीय वायुसेना के राफेल और रॉयल मलेशियन एयर फोर्स के सुखोई लड़ाकू विमान एक दूसरे के साथ उड़ानें भरेंगे।
इसके बाद भारतीय वायुसेना के व्यस्त कैलेंडर में जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के साथ होने वाला द्विपक्षीय वायु सैन्य अभ्यास वीर गार्जियन शामिल है। यह अभ्यास 12 सितंबर से 23 सितंबर तक राजस्थान के जोधपुर एयरबेस में आयोजित किया जाएगा। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक , भारतीय वायुसेना के सुखोई एसयू-30एमकेआई और जापान एयर सेल्फ डिफेंस फोर्स के एफ-2 लड़ाकू विमान इसमें हिस्सा लेने की तैयारी कर रहे हैं।
भारत और जापान के बीच वीर गार्जियन अभ्यास का पहला एडिशन साल 2023 में जापान के हयाकुरी एयरबेस पर आयोजित किया गया था। उस दौरान भारतीय वायुसेना की ओर से सुखोई एसयू-30एमकेआई, सी-17 और आईएल-78 मिड-एयर रीफ्यूलर विमान शामिल हुए थे, जबकि जापान की ओर से चार एफ-2 और चार एफ-15 लड़ाकू विमान ने भाग लिया था। भारत और जापान के बीच इस संयुक्त वायु सैन्य अभ्यास की शुरुआत का फैसला साल 2022 में टोक्यो में आयोजित 2 प्लस 2 डायलॉग के दौरान लिया गया था।
वीर गार्जियन के खत्म होते ही जोधपुर एयरबेस साल 2026 के सबसे बड़े मल्टी नेशनल वायु सैन्य अभ्यास तरंग शक्ति 2026 की मेजबानी करेगा। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक , भारत ने मित्र देशों की वायुसेनाओं को इस अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए इंविटेशन भेज दिया है। अब तक आधा दर्जन से ज्यादा देशों ने अपने लड़ाकू विमानों के साथ भागीदारी की सहमति दे दी है, जबकि कई देश ऑब्जर्वर के तौर में इस अभ्यास में शामिल होंगे।
भारतीय वायुसेना ने साल 2024 में अपने सबसे बड़े मल्टी नेशनल वायु सैन्य अभ्यास ‘तरंग शक्ति’ की शुरुआत की थी। उसी कड़ी में साल 2026 में इसका दूसरा संस्करण आयोजित किया जा रहा है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक , इस साल 26 सितंबर से राजस्थान के जोधपुर में यह अभ्यास शुरू होगा। करीब दो हफ्ते तक पाकिस्तान सीमा के करीब दुनिया भर के मित्र देशों के लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना के साथ साझा युद्धाभ्यास करेंगे।
तरंग शक्ति का पहला संस्करण साल 2024 में दो चरणों में आयोजित किया गया था। पहला चरण तमिलनाडु के सुलूर एयरबेस में और दूसरा चरण राजस्थान के जोधपुर एयरबेस में आयोजित हुआ था।
सुलूर एयरबेस पर आयोजित पहले चरण में फ्रांस के राफेल, जर्मनी, स्पेन और ब्रिटेन के यूरोफाइटर टाइफून लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। वहीं भारतीय वायुसेना के लगभग सभी प्रमुख प्लेटफॉर्म—राफेल, सुखोई, मिराज-2000, जैगुआर, तेजस, मिग-29 और प्रचंड—ने अपनी ऑपरेशनल क्षमता का प्रदर्शन किया था।
दूसरा चरण 29 अगस्त से 14 सितंबर तक जोधपुर में आयोजित किया गया था। इस चरण में ऑस्ट्रेलिया का ईए-18जी ग्रोलर, ग्रीस का एफ-16, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का एफ-16 तथा अमेरिका के ए-10 और एफ-16 सहित कुल 27 लड़ाकू विमान शामिल हुए थे। इसके अलावा दो एयर-टू-एयर रीफ्यूलर, दो एयरबोर्न अर्ली वार्निंग एंड कंट्रोल सिस्टम (एईडब्ल्यूएंडसी) और तीन स्पेशल फोर्स एयरक्राफ्ट भी इस अभ्यास का हिस्सा बने थे। इस दौरान सबसे अधिक चर्चा अमेरिका के ए-10 और ऑस्ट्रेलिया के ईए-18जी ग्रोलर विमान की रही।
तरंग शक्ति 2024 के दौरान पहली बार भारतीय थलसेना, वायुसेना और नौसेना—तीनों सेनाओं के वाइस चीफ ने एक साथ स्वदेशी तेजस लड़ाकू विमान में उड़ान भरी थी। मौजूदा वायुसेना प्रमुख और उस समय के वायुसेना उप प्रमुख एयर मार्शल एपी सिंह ने तेजस उड़ाते हुए इस खास फॉर्मेशन को लीड किया था। इसके अलावा फ्रांस और जर्मनी के वायुसेना प्रमुखों ने भी तेजस में उड़ान भरी थी, जबकि स्पेन के वायुसेना प्रमुख ने सुखोई एसयू-30एमकेआई में उड़ान भरकर इस अभ्यास में भाग लिया था।
–आईएएनएस
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