झारखंड में गंभीर रूप से ले रही मलेरिया, छह महीने में 16,728 केस, पूर्वी और पश्चिमी सिंहभूम सर्वाधिक प्रभावित जिले


रांची, 30 जुलाई (आईएएनएस)। झारखंड में मलेरिया के मामले इस वर्ष भी चिंता का विषय बने हुए हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार जनवरी से जून 2026 तक राज्य में मलेरिया के 16,728 मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से 76 प्रतिशत मामले पूर्वी सिंहभूम और पश्चिमी सिंहभूम जिले के हैं। राज्य में जून महीने में डेंगू के भी 77 मामले सामने आए हैं, जिनमें सबसे अधिक 27 मरीज रांची जिले से मिले हैं।

ये आंकड़े गुरुवार को रांची के नेपाल हाउस में स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से आयोजित वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम एवं नियंत्रण संबंधी राज्य स्तरीय टास्क फोर्स की बैठक में साझा किए गए।

बैठक की अध्यक्षता विभाग के अपर मुख्य सचिव ने की। बैठक में बताया गया कि जून 2026 तक पूर्वी सिंहभूम में 6,527 और पश्चिमी सिंहभूम में 6,172 मलेरिया के मामले दर्ज किए गए हैं। इन दोनों जिलों में राज्य के कुल मामलों का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा सामने आया है। इसे देखते हुए उच्च प्रभावित क्षेत्रों में समय पर जांच, त्वरित और पूर्ण उपचार, दवाओं की उपलब्धता, नियमित निगरानी, मच्छर नियंत्रण और जन-जागरूकता अभियान तेज करने के निर्देश दिए गए।

अपर मुख्य सचिव ने कहा कि मलेरिया, लिम्फेटिक फाइलेरिया, डेंगू, चिकनगुनिया, कालाजार और जापानी इंसेफेलाइटिस जैसे वेक्टर जनित रोगों की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए ग्रामीण विकास, पंचायती राज, नगर विकास, शिक्षा, श्रम तथा पेयजल एवं स्वच्छता सहित सभी संबंधित विभागों को समन्वित रूप से काम करना होगा।

उन्होंने इन बीमारियों की रोकथाम को जन-आंदोलन का स्वरूप देने पर जोर देते हुए जिला से पंचायत स्तर तक जिम्मेदारियां तय करने के निर्देश दिए। बैठक में लिम्फेटिक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम की भी समीक्षा की गई।

अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान के दौरान केवल दवाओं का वितरण ही नहीं, बल्कि पात्र लोगों को प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की मौजूदगी में दवा का सेवन भी सुनिश्चित कराया जाए। साथ ही फाइलेरिया मरीजों के उपचार, हाइड्रोसील सर्जरी, एमएमडीपी किट की उपलब्धता और नियमित फॉलो-अप को मजबूत बनाने पर बल दिया गया।

–आईएएनएस

एसएनसी/एएसएच


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