उत्तर प्रदेश: आजम खान के जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ विध्वंस आदेश पर फिलहाल रोक


मुरादाबाद, 27 जुलाई (आईएएनएस)। समाजवादी पार्टी के नेता और पूर्व सांसद आजम खान द्वारा स्थापित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को बड़ी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश सरकार के संभागीय आयुक्त ने रामपुर के जिला मजिस्ट्रेट द्वारा परिसर की 38 इमारतों के खिलाफ जारी विध्वंस आदेश पर फिलहाल रोक लगा दी है। एक अधिकारी ने सोमवार को यह जानकारी दी।

संभागीय आयुक्त ने रामपुर जिला प्रशासन को अगली सुनवाई तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है, जिससे परिसर की ओर बढ़ रहे बुलडोजरों पर रोक लग गई है।

जौहर विश्वविद्यालय को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने विश्वविद्यालय के भीतर कई उल्लंघनों को उजागर किया और दावा किया कि 40 में से 38 इमारतें आवश्यक स्वीकृतियों के बिना बनाई गई थीं।

आरडीए ने विश्वविद्यालय को एक निश्चित समय सीमा के भीतर स्वयं ही इन भवनों को हटाने का निर्देश दिया था, अन्यथा जिला प्रशासन इन्हें ध्वस्त करने के लिए हस्तक्षेप करेगा।

पिछले सप्ताह की शुरुआत में, रामपुर विकास प्राधिकरण द्वारा परिसर की 40 इमारतों में से 38 को ध्वस्त करने के आदेश के विरोध में सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं के एक समूह ने अयोध्या में सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया। आरोप है कि ये इमारतें बिना स्वीकृत योजनाओं के बनाई गई थीं।

उन्होंने शहर के जिला मजिस्ट्रेट को भारत के राष्ट्रपति को संबोधित एक ज्ञापन सौंपा और विश्वविद्यालय भवनों को ध्वस्त करने के प्रस्तावित कार्य को रोकने की मांग की।

ज्ञापन में, सपा कार्यकर्ताओं ने जौहर विश्वविद्यालय के खिलाफ प्रस्तावित कार्रवाई के विरुद्ध राष्ट्रपति के हस्तक्षेप की मांग की और जोर देकर कहा कि सभी पक्षों को कानूनी प्रक्रियाओं के अनुसार अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए।

पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे के नेतृत्व में हुए इस प्रदर्शन में सैकड़ों सपा कार्यकर्ताओं ने जौहर विश्वविद्यालय के समर्थन में नारे लगाए और सरकार पर राजनीतिक बदले की भावना से काम करने का आरोप लगाया।

तेज पांडे ने कहा कि राज्य प्रशासन को पूरे शिक्षण संस्थान को बंद करने के बजाय तकनीकी या दस्तावेजी खामियों को दूर करने का अवसर देना चाहिए।

उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार स्कूलों को बंद करके उनकी जगह शराब की दुकानें खोलना चाहती है।

पांडे ने कहा कि एक तरफ देश को ‘विश्व गुरु’ बनाने की बात हो रही है, वहीं, दूसरी तरफ बच्चों के हाथों से कलम और किताबें छीनने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि ज्ञान के मंदिरों पर बुलडोजर चलाकर देश को मजबूत नहीं बनाया जा सकता। यदि विश्वविद्यालय के भवन, योजना-सूची या अन्य दस्तावेजों में कोई खामी है, तो नियमों के अनुसार उन्हें दूर करने का अवसर दिया जाना चाहिए।

–आईएएनएस

एमएस/


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