मुल्लापेरियार बांध विवाद: सुरक्षा समिति में केरल के नए प्रतिनिधि की मांग, केंद्र सरकार के जवाब पर उठे कई सवाल

नई दिल्ली, 27 जुलाई (आईएएनएस)। केरल राज्य के इडुक्की जिले में स्थित मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा को लेकर केंद्र सरकार के ताजा जवाब ने एक बार फिर कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। राज्यसभा में सांसद डॉ. जॉन ब्रिटास के सवाल के जवाब में जल शक्ति मंत्रालय ने बताया कि राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (एनडीएसए) ने 25 जून 2026 को केरल सरकार को पत्र लिखा है।
पत्र में व्यापक बांध सुरक्षा मूल्यांकन (सीडीएसई) के लिए गठित स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति में राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए एक नए स्वतंत्र विशेषज्ञ का नाम भेजने का अनुरोध किया है।
केंद्र का यह कदम ऐसे समय आया है, जब पहले केरल के एकमात्र प्रतिनिधि को समिति से हटाए जाने को लेकर राज्य सरकार ने कड़ा विरोध दर्ज कराया था। केरल का कहना था कि उसके प्रतिनिधि को बिना पूर्व सूचना और बिना किसी परामर्श के हटाया गया, जिससे राज्य के हितों की अनदेखी हुई। अब एनडीएसए द्वारा नया नामांकन मांगने को सुधारात्मक पहल माना जा रहा है, लेकिन इससे पहले अपनाई गई प्रक्रिया पर उठे सवाल अब भी बने हुए हैं।
मुल्लापेरियार बांध का मुद्दा केरल के लाखों लोगों की सुरक्षा और जीवन से जुड़ा हुआ है। ऐसे में विशेषज्ञ समिति में राज्य का प्रभावी प्रतिनिधित्व अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। हालांकि, संसद में केंद्र सरकार ने उन प्रमुख सवालों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया जिनमें पूछा गया था कि क्या केरल सरकार से उसके प्रतिनिधि को हटाने से पहले कोई औपचारिक सलाह-मशविरा किया गया था।
सरकार ने सीधे ‘हां’ या ‘नहीं’ में उत्तर देने के बजाय कहा कि पूर्व नामित विशेषज्ञ ने समिति में कार्य जारी रखने में असमर्थता व्यक्त की थी, जिसके बाद मूल्यांकन कार्य समय पर पूरा करने के उद्देश्य से उनकी जगह दूसरे विशेषज्ञ को नियुक्त किया गया। लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया गया कि इस निर्णय से पहले राज्य सरकार को विश्वास में लिया गया था या नहीं।
इसके अलावा, विशेषज्ञ समिति में विभिन्न राज्यों के प्रतिनिधित्व से जुड़े सवाल पर भी सरकार ने स्पष्ट जानकारी नहीं दी। जवाब में केवल समिति के सदस्यों के नाम और उनकी पेशेवर संबद्धता का उल्लेख किया गया, जबकि यह नहीं बताया गया कि वे किन राज्यों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
बता दें कि केंद्रीय जल आयोग के पूर्व मुख्य अभियंता और समिति में केरल के प्रतिनिधि रहे टी.के. शिवराजन को हटाकर उनकी जगह उत्तर प्रदेश के एक विशेषज्ञ को शामिल किया गया था। इस फैसले पर केरल में व्यापक विरोध हुआ था और एनडीएसए की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए गए थे।
–आईएएनएस
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