बंगाली सिनेमा के महानायक उत्तम कुमार, जिन्हें मिला पहला 'बेस्ट एक्टर' अवॉर्ड

नई दिल्ली, 23 जुलाई (आईएएनएस)। यह कहानी है, अरुण कुमार चटर्जी की, जिन्हें पहचान उत्तम कुमार के नाम से मिली और आगे चलकर महानायक के नाम से मशहूर हुए। ये सिर्फ एक्टर ही नहीं, डायरेक्टर, प्रोड्यूसर और गायक भी रहे।
3 सितंबर 1926 को पश्चिम बंगाल के कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में जन्मे अरुण कुमार चटर्जी ने भवानीपुर के एक स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की लेकिन बदकिस्मती से उनकी पढ़ाई अधूरी रह गई। उन्होंने शुरुआत में कोलकाता पोर्ट ट्रस्ट में काम किया और इसी दौरान थिएटर से जुड़ाव होने लगा। परिवार में थिएटर की रवायत रही, तो उत्तम कुमार ने भी थिएटर की ओर रुख कर लिया।
सबसे छोटे भाई तरुण कुमार के नाम से प्रसिद्ध हुए और उन्होंने बंगाली सिनेमा में अपना दबदबा बनाया। अपने छोटे भाई तरुण कुमार के साथ उत्तम कुमार कई फिल्मों में नजर आए। बतौर एक्टर उत्तम कुमार की पहली फिल्म ‘दृष्टिदान’ रही, जो 1948 में आई थी। हालांकि, इसके पहले भी वह एक फिल्म ‘मायाडोर’ में काम कर चुके थे।
तकरीबन पांच फिल्मों में काम करने के बाद उत्तम कुमार को यह एहसास हुआ कि उनकी सभी फिल्में फ्लॉप साबित हुई हैं। इस दौर में उन्होंने अपने नाम कभी अरुण चटर्जी तो कभी अरुण कुमार रखे लेकिन आखिर में वे उत्तम कुमार के नाम से फिल्मों में काम करने लगे।
उत्तम कुमार की जिंदगी से जुड़े किस्सों में एक किस्सा यह भी शामिल है, जब लोग उन्हें ‘फ्लॉप मास्टर जनरल’ कहने लगे थे। जब ये स्टूडियो में पहुंचते थे, लोग इनका मजाक उड़ाया करते थे। इससे उनकी लोकप्रियता और आत्मविश्वास को जबरदस्त झटका लगा। ये इतने नाउम्मीद हो गए कि सिनेमा छोड़ने के विचार उनके मन में आने लगे थे। हालांकि, तब तक इनकी शादी गौरी चटर्जी से हो चुकी थी।
किस्मत ने बाजी पलटी और फिर एमपी स्टूडियो ने उन्हें तीन साल के कॉन्ट्रैक्ट पर रख लिया। कहा जाता है कि फिल्म ‘बासु परिवार’ ने उत्तम कुमार के डूबते करियर को बचाया। हालांकि, इसके बाद आई फिल्म ने सब कुछ पलटकर रख दिया। ये फिल्म थी ‘अग्निपरीक्षा’, जिसमें उत्तम कुमार सफल साबित हुए। यहां से ही उनके एक अनोखे रोमांटिक दौर की शुरुआत हुई।
बंगाली फिल्म इंडस्ट्री में उत्तम कुमार और सुचित्रा सेन की जोड़ी सबसे मशहूर जोड़ियों में से एक बनी। दोनों ने पहली बार ‘साढ़े चौहत्तर’ में काम किया, जो 1953 में आई थी। उन्होंने लगभग 30 फिल्मों में साथ काम किया, जिनमें से 29 सुपरहिट रहीं।
उन्होंने बड़े अनोखे और नए निर्देशकों के साथ काम किया। इसी दौर में एक ऐसी टीम बनकर उभर रही थी, जो मॉडर्न सिनेमा में गहरी छाप छोड़ने वाली थी। इनमें हेमंत मुखर्जी का नाम था, तो वहीं अनिल बागचीर, सुधीन दासगुप्ता और सलिल चौधरी भी रहे। उत्तम कुमार बड़ी आसानी से कोई भी किरदार निभा लेते थे। जब इनका चेहरा सिल्वर स्क्रीन पर आता, तो सब मंत्रमुग्ध हो जाते।
तीन दशक तक उत्तम कुमार बंगाली सिनेमा के सुपरस्टार बने रहे। अपने अभिनय को लगातार सुधारने के लिए वे थिएटर में भी लगे रहे। बंगाली सिनेमा के अलावा उन्होंने हिंदी फिल्मों की ओर रुख किया था और 15 फिल्मों में अपना किरदार निभाया था।
जब भारत सरकार ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता की श्रेणी बनाई, तब उत्तम कुमार पहले अभिनेता थे, जिन्हें बेस्ट एक्टर का अवॉर्ड मिला था। 1967 में आई ‘एंटनी फिरंगी’ और ‘चिड़ियाखाना’ के लिए उन्हें यह अवॉर्ड मिले।
उत्तम कुमार का निधन 24 जुलाई 1980 को हुआ। फिल्म ‘ओगो बंधु सुंदरी’ की शूटिंग के दौरान उन्हें अचानक सीने में दर्द हुआ और इलाज के दौरान उनका निधन हो गया।
–आईएएनएस
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