'शरावती परियोजना' कर्नाटक की बिजली जरूरतों के लिए महत्वपूर्ण: शिवकुमार

बेंगलुरु, 20 जुलाई (आईएएनएस)। कर्नाटक के मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सोमवार घोषणा की कि शरावती पंप स्टोरेज परियोजना राज्य की भविष्य की बिजली आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है और सरकार इसके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेगी।
वे पैलेस रोड स्थित बेंगलुरु सिटी यूनिवर्सिटी के ज्ञान ज्योति सभागार में आयोजित कर्नाटक पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केपीसीएल) के 57वें स्थापना दिवस समारोह का उद्घाटन करने के बाद बोल रहे थे।
उन्होंने कहा कि ‘शरावती पंप स्टोरेज परियोजना’ की नींव बहुत पहले रखी गई थी, लेकिन तब यह साकार नहीं हो सकी। अब इसे लागू करने के प्रयास जारी हैं और आवश्यक वैधानिक स्वीकृतियां प्राप्त की जा रही हैं। हालांकि कुछ लोग आपत्ति जता रहे हैं, लेकिन हम इस परियोजना से पीछे नहीं हटेंगे जो राज्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
इसी तरह के एक अनुभव को याद करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब केपीसीएल ने येलाहांका में गैस आधारित विद्युत संयंत्र का प्रस्ताव रखा था, तब इसका काफी विरोध हुआ था। हालांकि, राज्य के हित में इस परियोजना को लागू किया गया और अब यह बिजली उत्पादन कर रही है।
पावागड़ा सोलर पार्क का जिक्र करते हुए शिवकुमार ने कहा कि किसानों से जमीन खरीदने के बजाय, उन्हें परियोजना में हिस्सेदार बनाया गया, जिससे यह पूरे देश के लिए एक मिसाल बन गया। यह पार्क वर्तमान में 2,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन कर रहा है और क्षेत्र के किसान अब इसके विस्तार के लिए 10,000 एकड़ जमीन देने के लिए आगे आए हैं। विस्तार का काम जल्द ही शुरू होगा।
राज्य सरकार गृह ज्योति योजना के तहत 1.61 करोड़ परिवारों को मुफ्त बिजली प्रदान कर रही है और केपीसीएल ने इस योजना को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। सरकार गृह ज्योति योजना पर सालाना लगभग 10,000 करोड़ रुपए खर्च करती है।
इसी प्रकार, यह कृषि पंप सेटों को मुफ्त बिजली के लिए प्रतिवर्ष 20,000 करोड़ रुपए की सब्सिडी प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इन दोनों पहलों के परिणामस्वरूप राज्य के लोगों को लगभग 30,000 करोड़ रुपए की बचत हुई है।
कर्नाटक की प्रगति में सभी से योगदान देने का आह्वान करते हुए शिवकुमार ने कहा कि केपीसीएल कर्मचारियों को ‘टीम कर्नाटक’ होने पर गर्व होना चाहिए और राज्य के विकास और समृद्धि के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
–आईएएनएस
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