राजस्थान: स्कूल में छात्राओं के कपड़े उतरवाने और मारपीट के मामले का एनएचआरसी ने स्वतः संज्ञान लिया


नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने उन खबरों पर संज्ञान लिया है जिनमें आरोप लगाया गया है कि राजस्थान के सवाई माधोपुर जिले के एक सरकारी स्कूल में एक छात्रा के 1,000 रुपए खो जाने के बाद, टीचरों ने छात्राओं की तलाशी ली, उनके साथ मारपीट की और उन्हें कपड़े उतारने पर मजबूर किया।

मानवाधिकारों की सर्वोच्च संस्था ने माना कि अगर ये खबरें सच हैं, तो ये पीड़ित छात्राओं के मानवाधिकारों के उल्लंघन का गंभीर मामला है। इसलिए, संस्था ने राजस्थान के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर दो हफ्ते के अंदर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह घटना लिवली गांव के सरकारी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में हुई। वहां एक टीचर ने बताया कि 1,000 रुपए गायब हो गए हैं, जिसके बाद 9वीं और 11वीं क्लास की छात्राओं की तलाशी ली गई और उन्हें कपड़े उतारने के लिए मजबूर किया गया।

रिपोर्टों में यह भी दावा किया गया है कि तलाशी के दौरान दो टीचरों ने छात्राओं के साथ मारपीट भी की, हालांकि उनके पास से कोई पैसा नहीं मिला। रिपोर्टों के मुताबिक, घर लौटने पर छात्राओं ने अपने माता-पिता को घटना के बारे में बताया, जिसके बाद अगले दिन बड़ी संख्या में माता-पिता विरोध करने के लिए स्कूल पहुंचे।

इस बीच, राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने चीफ ब्लॉक एजुकेशन ऑफिसर (सीबीईओ) की रिपोर्ट के आधार पर सीनियर टीचर सरस्वती मीणा को घटना के लिए सस्पेंड कर दिया।

स्कूल की वोकेशनल एजुकेशन इंस्ट्रक्टर वंदना शर्मा को भी उनके काम से हटा दिया गया और सर्विस देने वाली एजेंसी के पास वापस भेज दिया गया।

राजस्थान स्कूल शिक्षा विभाग ने बाद में कहा कि वह छात्रों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्कूलों पर नजर रख रहा है और उसने अधिकारियों को राज्य भर के शिक्षण संस्थानों पर निगरानी मजबूत करने का निर्देश दिया है।

मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम, 1993 के तहत स्थापित एनएचआरसी एक स्वायत्त वैधानिक संस्था है और यह मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के प्रति भारत की चिंता का प्रतीक है। इसकी मुख्य भूमिका मानवाधिकारों की रक्षा और उन्हें बढ़ावा देना है। मानवाधिकारों का मतलब है जीवन, आजादी, समानता, निजता और सम्मान से जुड़े अधिकार, जिनकी गारंटी संविधान देता है या जो अंतरराष्ट्रीय समझौतों में शामिल हैं और जिन्हें भारत में अदालतों के जरिए लागू किया जा सकता है।

–आईएएनएस

पीएसके


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