क्वाड बैठक से पहले अमेरिकी राजदूत बोले, हिंद-प्रशांत में साझेदारों की भूमिका अहम


नई दिल्ली/वाशिंगटन, 20 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका के विदेश सचिव मार्को रुबियो आसियान बैठकों में शामिल होने और क्वाड समूह के विदेश मंत्रियों के साथ बातचीत करने के लिए फिलीपींस के लिए रवाना हो गए हैं।

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने कहा कि वह इस साल की दूसरी क्वाड मंत्रीस्तरीय बैठक का इंतजार कर रहे हैं और उन्होंने एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए वाशिंगटन की प्रतिबद्धता जताई।

गोर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया, “इस हफ्ते फिलीपींस में मार्को रुबियो के साथ हमारी साल की दूसरी मंत्रीस्तरीय क्वाड मीटिंग में शामिल होने का इंतजार कर रहा हूं। अमेरिका एक स्वतंत्र और खुले हिंद-प्रशांत के लिए प्रतिबद्ध है, हमारे क्वाड साझेदार जरूरी हैं।”

क्वाड चार देशों, भारत, ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका को एक साथ लाता है, जिनका कमिटमेंट दुनिया की भलाई के लिए एक ताकत के तौर पर काम करने और एक खुले, आजाद और सबको साथ लेकर चलने वाले हिंद-प्रशांत का समर्थन करने का है, जो खुशहाल और मजबूत हो।

रुबियो आसियान पोस्ट-मिनिस्ट्रियल कॉन्फ्रेंस, ईस्ट एशिया समिट विदेश मंत्रियों की बैठक और आसियान रीजनल फोरम फॉरेन मिनिस्टर्स मीटिंग में शामिल होने के लिए फिलीपींस जा रहे हैं। अमेरिकी राज्य विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट के जारी एक बयान के मुताबिक, उनका हिंद-प्रशांत देशों के सीनियर सरकारी अधिकारियों से मिलने का प्लान है।

अमेरिकी विदेश विभाग की प्रवक्ता टैमी पिगॉट ने कहा, “विदेश मंत्री की यह यात्रा अमेरिका की एक स्पष्ट प्राथमिकता को आगे बढ़ाती है, जिसका उद्देश्य एक स्वतंत्र और मुक्त हिंद-प्रशांत क्षेत्र सुनिश्चित करना है, जो पूरे क्षेत्र और अमेरिकी नागरिकों के लिए सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि लेकर आए। विदेश मंत्री मार्को रुबियो इस दौरे के दौरान अमेरिका-आसियान साझेदारी के ठोस परिणामों को प्रदर्शित करेंगे और फिलीपींस के साथ अमेरिका की व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करेंगे।”

इससे पहले मई में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर, ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री पेनी वोंग, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और जापान के विदेश मंत्री तोशिमित्सु मोतेगी ने क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लिया था।

बैठक के दौरान क्वाड देशों के विदेश मंत्रियों ने स्वतंत्र, मुक्त और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही उन्होंने क्षेत्रीय सहयोग को और मजबूत करने तथा हिंद-प्रशांत देशों को ठोस लाभ पहुंचाने वाली साझा पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की।

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, “हम पूर्वी चीन सागर और दक्षिण चीन सागर की स्थिति को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं। हम ऐसे किसी भी एकतरफा या अस्थिरता पैदा करने वाले कदम का कड़ा विरोध दोहराते हैं, जिसमें बल या दबाव का इस्तेमाल शामिल हो और जो क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए खतरा बनता हो।”

बयान में कहा गया, “हम अपतटीय संसाधनों के विकास में हस्तक्षेप, नौवहन और हवाई आवाजाही की स्वतंत्रता में बार-बार बाधा डालने, सैन्य विमानों, तटरक्षक जहाजों और समुद्री मिलिशिया के खतरनाक संचालन, विशेष रूप से वॉटर कैनन और फ्लेयर के असुरक्षित इस्तेमाल और जहाजों को टक्कर मारने या उनका रास्ता रोकने जैसी जबरदस्ती की कार्रवाइयों को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त करते हैं। दक्षिण चीन सागर में विवादित क्षेत्रों के बढ़ते सैन्यीकरण को लेकर भी हमारी गंभीर चिंता बनी हुई है।”

–आईएएनएस

केके/वीसी


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