अमेरिका-ईरान तनाव के बीच फिर शुरू होगी बातचीत? मध्यस्थों के प्रस्ताव मिलने की पुष्टि
नई दिल्ली, 20 जुलाई (आईएएनएस)। अमेरिका और ईरान के बीच एमओयू समझौता टूटने के बाद दोबारा जारी जंग से मिडिल ईस्ट में तनाव के हालात बने हुए हैं। दोनों ही ओर से लगातार हमले जारी हैं। इस बीच ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने मध्यस्थों की तरफ से प्रस्ताव भेजे जाने की बात कही। हालांकि, उन्होंने किसी की जानकारी साझा नहीं की।
भारत में ईरानी दूतावास ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पोस्ट में जानकारी साझा करते हुए लिखा, ”ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघेई ने कहा कि हमें मध्यस्थों की तरफ से कुछ प्रस्ताव मिले हैं, लेकिन इस समय मैं उनकी जानकारी साझा नहीं करना चाहूंगा। मैं इतनी पुष्टि जरूर कर सकता हूं कि ऐसे प्रस्ताव हमें भेजे गए हैं।”
दोनों देशों के बीच नौ दिनों से जारी जंग में एक ओर ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहा है, तो वहीं दूसरी ओर अमेरिका लगातार ईरान पर हमले कर रहा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने बताया कि ईरान के खिलाफ सैन्य हमलों का एक नया दौर शुरू हुआ है और इसका मकसद ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।
वहीं, ईरानी सेना ने दावा किया कि उसने ऑपरेशन ‘सैकेह’ (लाइटनिंग) के तहत कुवैत में मौजूद अमेरिका के दो बड़े सैन्य ठिकानों पर जबरदस्त हमले किए। ईरानी सेना का कहना है कि अमेरिका की ओर से बार-बार किए जा रहे घातक हमलों के जवाब में ये कार्रवाई की जा रही है।
वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि अमेरिका के साथ युद्ध तब तक नहीं रुकेगा, जब तक हमें लड़ाई में मजबूत बढ़त नहीं मिल जाती।
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “बातचीत भी तभी होनी चाहिए, जब ईरान ऐसी स्थिति में हो, जहां उसे लगे कि हालात उसके पक्ष में हैं।”
अराघची ने कहा कि किसी भी युद्ध का अंत दो तरह से होता है। पहला, जब किसी एक पक्ष को सैन्य जीत मिल जाए। दूसरा, जब दोनों पक्ष बातचीत करके समझौते पर पहुंचें। लेकिन, बातचीत तभी करनी चाहिए, जब संघर्ष में अपनी स्थिति मजबूत हो। जल्दबाजी में बातचीत करना सही नहीं होगा।
उन्होंने ईरान की सुरक्षा को भी अहम बताया। उन्होंने कहा कि लोगों की जान और देश के भविष्य को खतरे में नहीं डाला जा सकता। हर फैसला पूरी जानकारी और सही आकलन के बाद ही लिया जाना चाहिए।
–आईएएनएस
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