दिल्ली की अदालत ने नवजात बेटी की हत्या के आरोपी शख्‍स को सबूतों के अभाव में बरी किया


नई दिल्ली, 31 अगस्त (आईएएनएस)। दिल्ली की एक अदालत ने उस व्यक्ति को बरी कर दिया है, जिस पर 2019 में अपनी 21 दिन की बेटी का गला घोंटने और उसे डुबाकर मारने का मुकदमा चल रहा था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार मौत का कारण हाथ से गला घोंटने के कारण दम घुटना था।

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश गौतम मनन ने फैसला सुनाया कि आरोपी की पत्‍नी अपने आरोपों से मुकर गई और मुकदमे के दौरान मुकर गई, जिसके कारण उसे बरी कर दिया गया।

अदालत ने पाया कि घटना के समय घर में आरोपी की मौजूदगी साबित करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं थे और उसे कथित हत्या से जोड़ने वाला कोई मेडिकल या फोरेंसिक सबूत नहीं था।

अभियोजन पक्ष का मामला शिकायतकर्ता और मृत बच्चे की मां किरण द्वारा प्रदान किए गए विवरण पर बहुत अधिक निर्भर था।

उसने शुरू में आरोप लगाया कि उसने अपने पति मुकेश को अपनी नवजात बेटी का गला घोंटने और डुबाने की बात कबूल करते हुए देखा था।

हालांकि, अपनी अदालती गवाही के दौरान किरण ने इन आरोपों का समर्थन नहीं किया और दावा किया कि उसने बच्‍ची को छत के फर्श पर पाया।

एक अन्य गवाह, आरोपी की भतीजी बबीता ने भी कथित तौर पर आरोपी को अपराध कबूल करते हुए सुना था। हालांकि, वह भी अपने बयान से मुकर गई और अभियोजन पक्ष के मामले का समर्थन नहीं किया।

अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष के सभी गवाह अपने बयान से मुकर गए और अभियुक्तों के खिलाफ अभियोगात्मक सबूत देने में विफल रहने पर उन्हें शत्रुतापूर्ण कृत्‍य करने वाला घोषित कर दिया गया।

इसके अलावा, आरोपी के पिता, मां और भाई ने घटना के दौरान घर में उसकी मौजूदगी की गवाही नहीं दी।

रिकॉर्ड पर कोई अन्य चिकित्सा, फोरेंसिक या पुष्टि करने वाला सबूत नहीं होने के कारण अदालत ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष आरोपियों के खिलाफ आरोप स्थापित करने में विफल रहा और मुकेश को सभी आरोपों से बरी कर दिया।

–आईएएनएस

एसजीके


Show More
Back to top button