प्रधानमंत्री मोदी की तीन देशों की यात्रा से बहुत कुछ सीख सकता है बांग्लादेश: रिपोर्ट


ढाका, 18 जुलाई (आईएएनएस)। भारत की कूटनीतिक सक्रियता अब केवल बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों पर प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि वह क्षेत्रीय व्यवस्था को आकार देने में अहम हो चली हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड यात्रा भारत की इंडो-पैसिफिक रणनीति में बढ़ती सक्रियता का संकेत है।

बांग्लादेशी अखबार ‘डेली सन’ की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी की 6 से 11 जुलाई तक की छह दिवसीय यात्रा केवल उच्चस्तरीय बैठकों तक सीमित नहीं थी, बल्कि इसका उद्देश्य बढ़ते वैश्विक ध्रुवीकरण के बीच भारत की रणनीतिक और आर्थिक भूमिका को मजबूत करना था।

रिपोर्ट कहती है कि इंडो-पैसिफिक क्षेत्र अब अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और तकनीक के बीच बढ़ते जुड़ाव का प्रमुख केंद्र बन चुका है। अमेरिका और चीन के बीच प्रतिस्पर्धा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं, समुद्री सुरक्षा और महत्वपूर्ण संसाधनों तक पहुंच को प्रभावित कर रही है।

भारत को केवल एक प्रतिस्पर्धी के तौर पर प्रोजेक्ट नहीं किया गया, बल्कि रिपोर्ट इस प्रक्रिया में शामिल पक्ष के तौर पर भारत का उल्लेख करती है। इसके मुताबिक, भारत खुद को केवल इस प्रतिस्पर्धा में भाग लेने वाले देश के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि क्षेत्र के प्रमुख एजेंडा तय करने वाले देशों में शामिल होने की कोशिश कर रहा है।

रिपोर्ट के मुताबिक, इंडोनेशिया के साथ बातचीत में समुद्री सहयोग, रक्षा संबंधों और महत्वपूर्ण खनिजों पर ध्यान केंद्रित किया गया। ऑस्ट्रेलिया के साथ ऊर्जा सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिजों और व्यापक आर्थिक सहयोग समझौते (सीईसीए) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। न्यूजीलैंड के साथ कृषि, शिक्षा, नवाचार और आर्थिक सहयोग को बढ़ाने पर जोर दिया गया।

इन यात्राओं ने भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ को आगे बढ़ाने के साथ-साथ स्वतंत्र, खुले और नियम आधारित इंडो-पैसिफिक की सोच को मजबूत किया है।

रिपोर्ट में कहा गया कि बांग्लादेश को भारत की क्षेत्रीय रणनीति को केवल द्विपक्षीय संबंधों के नजरिए से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसे पूरे क्षेत्र में हो रहे बदलावों के संदर्भ में समझना चाहिए।

इसके अनुसार, भारत की आर्थिक रणनीति को प्रतिस्पर्धा के बजाय अवसर के रूप में देखा जा सकता है। इससे बांग्लादेश को औद्योगिक सहयोग बढ़ाने, तकनीकी निवेश आकर्षित करने और क्षेत्रीय सप्लाई चेन से जुड़ने में मदद मिल सकती है।

ये रिपोर्ट बांग्लादेश का ध्यान प्रमुख मुद्दे की ओर दिलाती है। इसमें कहा गया है, “भारत और बांग्लादेश के संबंध लंबे समय से सीमा, संपर्क व्यवस्था और नदी जल बंटवारे जैसे मुद्दों पर केंद्रित रहे हैं, लेकिन अब रणनीतिक ध्यान धीरे-धीरे बंगाल की खाड़ी की ओर बढ़ रहा है। भारत का समुद्री निगरानी तंत्र, बंदरगाह संपर्क और सुरक्षित समुद्री मार्गों पर जोर इस बात को दर्शाता है कि आर्थिक विकास के लिए समुद्री क्षेत्र की भूमिका लगातार बढ़ रही है।”

रिपोर्ट के अनुसार, भारत और बांग्लादेश के बीच बेहतर समुद्री सहयोग से आपदा प्रबंधन, मत्स्य पालन, समुद्री अनुसंधान, बंदरगाह दक्षता और व्यापारिक समुद्री मार्गों की सुरक्षा को मजबूती मिल सकती है।

इसमें कहा गया, “बंगाल की खाड़ी को केवल साझा जल क्षेत्र के रूप में नहीं, बल्कि एक साझा आर्थिक क्षेत्र के रूप में देखने की रूरत है, जहां क्षेत्रीय देश मिलकर विकास के नए अवसर पैदा कर सकते हैं।”

–आईएएनएस

केआर/


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