रोशडेल ग्रूमिंग गैंग के सरगना को पाकिस्तान भेजने की तैयारी, ब्रिटेन कानूनी बदलाव पर कर रहा विचार


लंदन, 10 जुलाई (आईएएनएस)। ब्रिटेन सरकार उस कानूनी प्रावधान में बदलाव पर विचार कर रही है, जिसकी वजह से फिलहाल रोशडेल ग्रूमिंग गैंग के मुख्य आरोपी को पाकिस्तान निर्वासित नहीं किया जा सकता। ब्रिटेन की स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, बताया जा रहा है कि गृह सचिव शबाना महमूद इस बदलाव को फास्ट-ट्रैक कानून के जरिए लागू करने या इमिग्रेशन एवं असाइलम बिल में संशोधन के रूप में शामिल करने के विकल्पों पर विचार कर रही हैं।

ब्रिटेन के एक स्वतंत्र रिपोर्ट के अनुसार, रोशडेल ग्रूमिंग गैंग का सरगना शब्बीर अहमद, जिसने कई दुष्कर्म और यौन अपराध के लिए 14 साल जेल में काटे हैं, पिछले हफ्ते जेल से रिहा हो गया। ब्रिटेन की नागरिकता छीन लिए जाने के बावजूद शब्बीर अहमद को इमिग्रेशन एक्ट 1971 में 55 साल पुरानी कमी की वजह से पाकिस्तान डिपोर्ट नहीं किया जा सकता। यह उन लोगों को सुरक्षा देता है जो 1973 से पहले ब्रिटेन आए थे और कम से कम पांच साल वहां रहे थे।

रिपोर्ट के अनुसार, रूबी नामक एक पीड़ित समेत अन्य पीड़ितों ने अहमद की रिहाई के बाद अपनी सुरक्षा को लेकर डर जताया और सरकार से कानून में बदलाव करने की अपील की है, ताकि ग्रूमिंग गैंग के सदस्यों को डिपोर्ट किया जा सके।

पाकिस्तान शबीर अहमद को स्वीकार करने से इनकार कर रहा है और इसके बदले ब्रिटेन में रह रहे दो राजनीतिक असंतुष्टों के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है।

2 जुलाई को 73 वर्षीय शबीर अहमद को जेल से रिहा कर दिया गया, जबकि उसकी पैरोल हासिल करने की तीन कोशिशें पहले ही खारिज हो चुकी थीं। पैरोल की उसकी सबसे हालिया याचिका अक्टूबर 2024 में खारिज हुई थी। वर्ष 2023 की एक समीक्षा से जुड़े दस्तावेज में अहमद को यौन अपराध दोहराने का उच्च जोखिम वाला व्यक्ति बताया गया था। यह जानकारी ब्रिटेन के द गार्जियन की एक रिपोर्ट में सामने आई।

अहमद की पीड़िताओं में से एक एम्बर ने कहा कि उसकी रिहाई की खबर के बाद वह शारीरिक रूप से बीमार जैसा महसूस कर रही हैं और उन्हें नींद नहीं आ रही है। उन्हें अहमद और उसके सहयोगियों से अब भी खतरा महसूस होता है। एम्बर उन लगभग 50 लड़कियों में शामिल थीं, जिनका वर्ष 2008 के आसपास से अहमद और उसके नेटवर्क द्वारा यौन शोषण और मानव तस्करी की गई थी।

द गार्डियन की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 में शब्बीर अहमद को दो अलग-अलग ट्रायल में दुष्कर्म और यौन अपराध के आरोपों में दोषी पाए जाने के बाद 22 साल की जेल हुई थी। दोषी पाए जाने के बाद उसकी ब्रिटेन की नागरिकता छीन ली गई थी।

ब्रिटेन में बाल यौन शोषण को लेकर एक प्राइवेट-फंडेड संसदीय जांच के बाद जून की शुरुआत में जारी 219-पेज की रिपोर्ट से पता चला कि कई दशकों में कम से कम 250,000 लड़कियों और शायद इससे भी ज्यादा लड़कियों के साथ सामूहिक बलात्कार, तस्करी, टॉर्चर और जबरदस्ती प्रेग्नेंसी हुई, जिसमें ज्यादातर दोषी पाकिस्तानी मुस्लिम मूल के थे और मदद करने वाले ज्यादातर ब्रिटिश सरकार के थे।

बलात्कार समूह की जांच, जिसकी अध्यक्षता रिफॉर्म यूके के सांसद रूपर्ट लो ने की और जिसका संचालन यौन शोषण से बची पीड़िता एवं सामाजिक कार्यकर्ता सैमी वुडहाउस ने किया, 20,000 से अधिक लोगों के आर्थिक सहयोग से संचालित हुई। हालांकि इस जांच को वैधानिक (स्टैच्यूटरी) अधिकार प्राप्त नहीं थे, फिर भी इसमें कई सार्वजनिक सुनवाई के दौरान पीड़ितों, व्हिसलब्लोअर्स, राजनेताओं और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों की गवाही दर्ज की गई। यह जानकारी अमेरिका स्थित दक्षिण एशियाई टीवी नेटवर्क दिया टीवी की एक रिपोर्ट में दी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, यह जांच इसलिए शुरू की गई क्योंकि राज्य और उसकी संस्थाएं “दशकों तक विनाशकारी रूप से विफल” रहीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि पुलिस, सामाजिक सेवाएं, स्कूल, एनएचएस, लाइसेंसिंग प्राधिकरण और स्थानीय व राष्ट्रीय स्तर की लगातार सरकारों ने संगठित गिरोहों को काम करने की अनुमति दी, जिसे रिपोर्ट ने ब्रिटिश राज्य की “सक्रिय या निष्क्रिय सहमति” करार दिया।

रिपोर्ट में ब्रिटेन में पाकिस्तानी गैंग रेप का पहला दर्ज मामला भी शामिल है। इसके अनुसार, वर्ष 1955 में ब्रैडफोर्ड के चार पाकिस्तानी पुरुषों पर मिडिल्सब्रा की 15 वर्षीय किशोरी से सामूहिक दुष्कर्म का आरोप लगाया गया था।

दिया टीवी की रिपोर्ट में कहा गया है, “250,000 का आंकड़ा 2019 में हाउस ऑफ लॉर्ड्स में रैनोक के लॉर्ड पियर्सन के बयान से आया है। उन्होंने रॉदरहैम में जे रिपोर्ट के नतीजों से यह अनुमान लगाया था, जहां 1997 और 2013 के बीच कम से कम 1,400 लड़कियों के साथ गलत व्यवहार हुआ था, साथ ही टेलफोर्ड, ऑक्सफोर्ड, रोशडेल और दूसरी जगहों पर इसी तरह की जांच की गई थी।”

रिपोर्ट में कहा गया, “ब्रिटिश सरकार ने कभी भी गलत व्यवहार के पूरे पैमाने को सिस्टमैटिक तरीके से रिकॉर्ड नहीं किया, कि सभी तरह की यौन हिंसा की आम तौर पर कम रिपोर्ट की जाती है और द इंडिपेंडेंट ने पाया कि इंग्लैंड में एक ही साल में लगभग 19,000 बच्चों की पहचान यौन शोषण के शिकार के तौर पर हुई, जबकि इस समस्या का नाम लेने के लिए संस्थागत विरोध था।”

जांच रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन के कम से कम 149 स्थानीय प्रशासनिक क्षेत्रों में ऐसे गिरोहों के सक्रिय होने के सबूत मिले हैं। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अदालत के रिकॉर्ड और आधिकारिक जांचों में सामूहिक रूप से बच्चों के यौन शोषण के मामलों में दोषी ठहराए गए लोगों में लगभग 87 फीसदी के नाम मुस्लिम थे।

–आईएएनएस

केके/पीएम


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