पाकिस्तान का 'मास एचआईवी' मामला: 78 बच्चों को लगाई गई संक्रमित सुई, महीनों बाद हुई जांच शुरू

कराची, 8 जुलाई (आईएएनएस)। पाकिस्तान मास एचआईवी संक्रमण का खुलासा नवंबर में हुआ था। मामला सिंध प्रांत के एक सरकारी अस्पताल का था। जहां 10 या 20 नहीं बल्कि 78 बच्चों को इलाज के दौरान संक्रमित सुई लगाई गई और वो जानलेवा बीमारी के शिकार हो गए। पीड़ित परिवार तब से आरोपी स्टाफ के खिलाफ एक्शन लेने की बात कर रहे थे। महीनों बाद अब कोर्ट की दखलअंदाजी के बाद जिम्मेदारों के खिलाफ जांच के आदेश दिए गए।
ब्रिटेन के समाचार पत्र द टेलीग्राफ में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, सिंध स्थित ‘कुलसूम बाई वालिका अस्पताल’ में 78 बच्चे एचआईवी से संक्रमित पाए गए।
रिपोर्ट में कहा गया कि इस मामले की जांच ऐसे समय शुरू हुई है, जब पीड़ित परिवार कई महीनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। उनका आरोप है कि पिछले वर्ष नवंबर में संक्रमण का मामला सामने आने के बावजूद अधिकारियों ने स्वतंत्र जांच के आदेश नहीं दिए।
आखिरकार पीड़ितों ने सिंध हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अदालत ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर रिपोर्ट दाखिल कर संक्रमण की वजह बताने का निर्देश दिया।
अदालत में दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि अस्पताल में डिस्पोजेबल सिरिंजों का दोबारा इस्तेमाल किए जाने के कारण 200 से अधिक बच्चे एचआईवी से संक्रमित हुए।
परिजनों ने यह भी दावा किया है कि इनमें से नौ बच्चों की मौत हो चुकी है, हालांकि अधिकारियों ने अभी तक इन आंकड़ों की पुष्टि नहीं की है।
याचिका में कहा गया है कि डिस्पोजेबल सिरिंजों का दोबारा इस्तेमाल आपराधिक लापरवाही का मामला है। साथ ही आरोप लगाया गया कि अधिकारियों ने न तो घटना की उचित जांच कराई और न ही पीड़ित बच्चों के इलाज की समुचित व्यवस्था की।
यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब पाकिस्तान में बच्चों में एचआईवी संक्रमण के मामलों को लेकर चिंता लगातार बढ़ रही है।
द टेलीग्राफ ने सिंध के स्वास्थ्य विभाग के हवाले से बताया कि इस वर्ष जनवरी से मार्च के बीच प्रांत में दर्ज 894 एचआईवी मामलों में से 329 मामले बच्चों के थे।
पाकिस्तान में हाल के वर्षों में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े एचआईवी संक्रमण के कई मामले सामने आए हैं। इनमें 2019 का रतोडेरो (सिंध) एचआईवी प्रकोप प्रमुख है, जहां कथित तौर पर संक्रमित सुइयों के दोबारा इस्तेमाल से सैकड़ों बच्चे संक्रमित हो गए थे। बाद में विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की जांच में असुरक्षित इंजेक्शन पद्धतियों को इस प्रकोप का मुख्य कारण बताया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जून 2019 तक लगभग तीन लाख आबादी वाले रतोडेरो कस्बे में 800 से अधिक बच्चे एचआईवी पॉजिटिव पाए गए थे। इसके बाद कोविड-19 महामारी के कारण यह मामला वैश्विक सुर्खियों से बाहर हो गया, लेकिन संक्रमण के मामले लगातार सामने आते रहे।
–आईएएनएस
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