फिनटेक सेक्टर में आ रहा बड़ा बदलाव, अब ग्रोथ की जगह भरोसा जीतने पर फोकस कर रही कंपनियां : रिपोर्ट

नई दिल्ली, 7 जुलाई (आईएएनएस)। भारत के फिनटेक सेक्टर में अब कंपनियों का फोकस ग्रोथ की जगह अब ग्राहकों का भरोसा जीतने, गवर्नेंस और मजबूती पर है। साथ ही, सेक्टर में 59 प्रतिशत कंपनियां अपनी साख और ब्रांड से जुड़े जोखिम को बहुत गंभीर चिंता मानती हैं। यह जानकारी मंगलवार को जारी एक रिपोर्ट में दी गई।
फिनटेक एसोसिएशन फॉर कंज्यूमर एम्पावरमेंट (एफएसीई) और ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों के लिए प्रतिष्ठा से जुड़े जोखिम के बाद इंटरऑपरेबिलिटी और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े जोखिम 51 प्रतिशत के साथ दूसरे स्थान पर हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्राहकों का भरोसा डेटा लीक और साइबर सुरक्षा की घटनाओं से लेकर अनधिकृत संस्थाओं की गलत हरकतों जैसी समस्याओं से प्रभावित हो सकता है। इस तरह, प्रतिष्ठा गवर्नेंस, नियमों का पालन, ग्राहकों के अनुभव और डेटा सुरक्षा का नतीजा होती है।
रिपोर्ट में बताया गया कि फिनटेक कंपनियां यूपीआई और आधार जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर ज्यादा निर्भर हो रही हैं। साथ ही, उन्हें भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर इकोसिस्टम के लगातार विकास और मजबूती पर भरोसा है।
यूपीआई, आधार, ई-केवाईसी और अकाउंट एग्रीगेटर जैसे डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर की मदद से भारत का फिनटेक इकोसिस्टम देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था का एक अहम हिस्सा बन गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि जोखिमों के मामले में मार्केट कॉम्पिटिशन और कंडक्ट रिस्क तीसरे नंबर पर है और इनका औसत गंभीरता स्कोर 6.9 था। वहीं, डेटा एक्सेस, प्राइवेसी और सुरक्षा का स्कोर 6.6 रहा और साइबर सुरक्षा, टेक्नोलॉजी और बिजनेस कंटिन्यूटी का स्कोर 6.5 रहा।
जोखिम की रैंकिंग 1 से 10 के पैमाने पर उत्तरदाताओं द्वारा दिए गए वेटेड एवरेज गंभीरता स्कोर पर आधारित है।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और फाइनेंशियल सर्विसेज रिस्क एडवाइजरी लीडर विवेक अय्यर ने कहा, “मुनाफे, विकास और भरोसे के बीच संतुलन बनाना फिनटेक इकोसिस्टम के लिए मुख्य कारकों में से एक बन गया है, और फिनटेक बैरोमीटर रिपोर्ट इसी बात पर जोर देती है। पेमेंट, निवेश, क्रेडिट और बीमा जैसे क्षेत्रों में फिनटेक इकोसिस्टम के पास एक दशक पहले की तुलना में अधिक मजबूत आय और गवर्नेंस मॉडल हैं, जो उन्हें विकास के रास्ते पर आगे बढ़ने में मदद कर रहे हैं।”
लगभग 46 प्रतिशत उत्तरदाताओं ने साइबर और कंटिन्यूटी जोखिमों को उच्च गंभीरता वाला माना, जो साइबर रेजिलिएंस, धोखाधड़ी की रोकथाम और ऑपरेशनल कंटिन्यूटी में लगातार निवेश को दर्शाता है।
वहीं, धोखाधड़ी, एमएमएल/सीएफटी और वित्तीय अपराध, साथ ही मैक्रो-इकोनॉमिक और फंडिंग जोखिमों को मौजूदा ऑपरेटिंग माहौल में अपेक्षाकृत रूप से संभालने योग्य माना गया। इसमें रेगुलेटरी हस्तक्षेप, धोखाधड़ी पर बेहतर नियंत्रण और भारत के फिनटेक सेक्टर में निवेशकों का लगातार भरोसा मददगार साबित हुआ।
यह रिपोर्ट लेंडिंग, पेमेंट, रेगटेक, कलेक्शन-टेक और टेकफिन्स क्षेत्रों में काम करने वाली 39 एफएसीई सदस्य फिनटेक कंपनियों के सर्वे पर आधारित है।
–आईएएनएस
एबीएस