पश्चिम एशिया संकट के दौरान ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनाए रखने के लिए सरकार ने तेजी से उठाए कदम: नवदीप सूरी


नई दिल्ली, 29 जून (आईएएनएस)। संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भारत के पूर्व राजदूत नवदीप सूरी ने सोमवार को कहा कि हालांकि 28 फरवरी को होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होरमुज) के बंद होने की स्थिति वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए सबसे खराब परिस्थितियों में से एक थी, लेकिन भारत सरकार ने तेजी से कदम उठाकर इस संकट का प्रभावी ढंग से सामना किया और देश में ईंधन की आपूर्ति सामान्य बनाए रखी।

न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में सूरी ने कहा, “मुझे लगता है कि इस दौरान सरकार ने काफी सक्रिय ऊर्जा कूटनीति का प्रदर्शन किया।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने यूएई, सऊदी अरब और कतर जैसे देशों के साथ जो विशेष संबंध बनाए हैं, वे इस संकट के समय बेहद काम आए। उन्होंने बताया कि 15 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यूएई यात्रा और युद्ध के दौरान पेट्रोलियम मंत्री की कतर यात्रा इसका उदाहरण हैं। सूरी ने कहा कि इन मजबूत संबंधों की वजह से भारत को एलपीजी और कच्चे तेल जैसी ऊर्जा आपूर्ति लगातार मिलती रही।

पूर्व राजदूत ने यह भी कहा कि इस दौरान भारत की कूटनीति की एक और बड़ी सफलता यह रही कि उसने खाड़ी देशों के अलावा रूस, फिर अमेरिका और साथ ही वेनेजुएला, नाइजीरिया, गैबॉन और गुयाना जैसे अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के नए आपूर्तिकर्ता देशों से भी तेल आयात के स्रोत बढ़ाए।

उन्होंने कहा, “इन सभी प्रयासों की वजह से, जब कई दूसरे देश गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहे थे, तब भारत काफी हद तक इस संकट से बचने में सफल रहा।”

सूरी ने आगे यह भी कहा कि सरकार ने उपभोक्ताओं के लिए ईंधन की कीमतें भी नियंत्रित रखने में सफलता हासिल की। जब 28 फरवरी के बाद युद्ध शुरू होने पर वैश्विक तेल कीमतों में तेज बढ़ोतरी हुई, तब सरकार और तेल कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद वहन किया।

उन्होंने आईएएनएस से कहा, “सरकार ने टैक्स में कटौती की और तेल कंपनियों ने अपने मुनाफे का कुछ हिस्सा छोड़ा, जिससे आम लोगों पर कीमतों का बोझ नहीं पड़ा।”

उन्होंने कहा कि सरकार ने ईंधन की कीमतों को संभालने में काफी समझदारी दिखाई। उनका मानना है कि सरकार का मुख्य उद्देश्य यही था कि कम से कम शुरुआती दौर में आम उपभोक्ताओं को महंगाई से बचाया जाए।

सूरी ने बताया कि जब वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई थी, तब इस भारी बढ़ोतरी का अधिकांश बोझ सरकार ने अपने ऊपर लिया।

उन्होंने कहा कि यह सफलता कई रणनीतियों के मेल से मिली। एक ओर भारत ने यूएई, अमेरिका, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका जैसे देशों से तेल और गैस की आपूर्ति लगातार जारी रखी, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर भी ईंधन की मांग को बेहतर तरीके से प्रबंधित किया गया। उन्होंने कहा कि भारत ने कम समय में एलपीजी का घरेलू उत्पादन बढ़ाया, जिससे स्थिति को संभालने में काफी मदद मिली।

सूरी ने कहा कि इसकी तुलना यदि पाकिस्तान जैसे देशों से की जाए, जहां स्कूल बंद करने पड़े या कई देशों में ईंधन के लिए लंबी कतारें और भारी कमी देखने को मिली, तो भारत पर ऊर्जा संकट का असर बहुत कम पड़ा और देश में ईंधन की उपलब्धता लगभग सामान्य बनी रही।

–आईएएनएस

डीबीपी


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