राम मंदिर चढ़ावा विवाद के बाद लोगों का भरोसा कैसे होगा बहाल, वीएचपी अध्यक्ष ने बताया रास्ता


गाजियाबाद, 26 जून (आईएएनएस)। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने शुक्रवार को राम मंदिर चंदा चोरी के मामले में कहा कि राम मंदिर में बिना किसी देरी के एक मजबूत और अचूक सिस्टम बनाया जाना चाहिए, ताकि इस तरह की घटना भविष्य में दोहराई न जाए।

आईएएनएस से बात करते हुए वीएचपी अध्यक्ष आलोक कुमार ने कहा कि मुझे इस्तीफे के बारे में कोई पक्की जानकारी नहीं है, लेकिन मेरा मानना ​​है कि राम मंदिर में बिना किसी देरी के एक मजबूत और अचूक सिस्टम बनाया जाना चाहिए। इसमें एक मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) की नियुक्ति शामिल हो सकती है। कोई ऐसा वरिष्ठ अधिकारी जिसके पास प्रशासन का अनुभव हो और जो पूरी तरह समर्पित हो।

उन्होंने कहा कि ऊपर से नीचे तक एक जैसी कार्यप्रणाली की जरूरत है। ऐसे लोगों की भर्ती की जानी चाहिए जिन पर उनकी पेशेवर क्षमता और ईमानदारी के लिए भरोसा किया जा सके। साथ ही जरूरी उपकरण और तकनीक भी हों। कुल मिलाकर ऐसा सिस्टम हो जिससे भगवान के पैसे का एक रुपया भी इधर-उधर न हो, तीर्थयात्रियों को दर्शन के लिए ज्यादा से ज्यादा सुविधाएं मिलें और उनकी यात्रा सार्थक हो, साथ ही मंदिर की अन्य व्यवस्थाएं भी ठीक से चलें। मुझे भरोसा है कि ट्रस्टी अब यह पक्का करेंगे कि ये सभी व्यवस्थाएं लागू हों।

उन्होंने कहा कि श्रीराम और भक्तों के बीच का रिश्ता तो बना हुआ है। सबसे जरूरी बात यह है कि अब अनुभवी और सीनियर पुलिस अधिकारी इस एफआईआर की तेजी से जांच करें। सभी आरोपों की पूरी तरह से जांच हो। सभी दोषियों को ईमानदारी से सजा दिलाई जाए और उन्हें दोषी ठहराकर जेल भेजा जाए। अगर ऐसा होता है, तो लोगों का भरोसा फिर से बहाल होगा।

राम मंदिर चंदे में गड़बड़ी के मामले पर समाजवादी पार्टी के सवाल उठाने पर आलोक कुमार ने कहा कि कुछ सवाल तो मजेदार हैं, लेकिन मुझे उनसे कोई फर्क नहीं पड़ता। समाजवादी पार्टी हमेशा से राम और राम मंदिर का विरोध करती रही है और उन्हें अब भी इससे कोई लगाव नहीं है। वे 2027 के विधानसभा चुनावों के लिए प्रचार कर रहे हैं, इसलिए मैं उनके बयानों को बहुत गंभीरता से नहीं लेता।

गाजियाबाद से सुप्रीम कोर्ट के वकील हरिशंकर जैन ने कहा कि श्री राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे को लेकर कथित तौर पर घोटाला, चोरी और गबन हुआ है। सवाल यह है कि इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह कैसे हुआ और इसे दोबारा होने से रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएंगे? असल मुद्दा यही है कि दोषी चाहे जितना बड़ा हो, बचना नहीं चाहिए, निर्दोष को सजा नहीं होनी चाहिए।

इसी बीच, आईएएनएस से ​​बात करते हुए आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा कि यह चोरी किसी व्यापारी की दुकान या किसी बिजनेसमैन की फैक्ट्री में नहीं हुई है। यह लोगों की आस्था की लूट है। एक-दो इस्तीफों से कोई फर्क नहीं पड़ता।

आचार्य प्रमोद कृष्णम ने कहा, “इस मामले की गहराई में जाने की जरूरत है। यह सिर्फ 200 करोड़ रुपए का मामला नहीं है, बल्कि 1,000 करोड़ रुपए का मामला है। यह पाप किसने किया, इसका पता चलना चाहिए।”

उन्होंने आगे कहा कि देश के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा है।

उन्होंने कहा, “देश के लोगों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भरोसा है कि इस मामले की पारदर्शी जांच होगी। इसलिए पारदर्शिता के लिए इस्तीफा जरूरी था, क्योंकि पद पर बने रहना मायने नहीं रखता, धर्म का पालन करना मायने रखता है।”

उन्होंने कहा, “विपक्ष प्रधानमंत्री मोदी, मुख्यमंत्री योगी और राम मंदिर को बदनाम करने की कोशिश कर रहा है। यह वही विपक्ष है जो भगवान राम के खिलाफ था और जिसने राम मंदिर के निर्माण का विरोध किया था, हालांकि भगवान राम में लोगों की आस्था कभी कम नहीं होगी। विपक्ष को इसकी चिंता नहीं करनी चाहिए।”

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी


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