त्रिपुरा सरकार का दूध उत्पादन को बढ़ाने के लिए एनडीडीबी के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर


अगरतला, 23 जून (आईएएनएस)। दूध उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल करने और डेयरी सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के तौर पर, त्रिपुरा के पशु संसाधन विकास विभाग (एआरडीडी) और नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (एनडीडीबी) ने मंगलवार को एक त्रिपक्षीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

यह समझौता त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा की मौजूदगी में किया गया। उन्होंने इस पहल को बदलाव लाने वाला बताया, जिसका मकसद राज्य भर में दूध का उत्पादन बढ़ाना, सहकारी इंफ्रास्ट्रक्चर को बेहतर बनाना और डेयरी उत्पादकों के लिए बाजार के बेहतर मौके बनाना है।

साहा ने कहा कि त्रिपुरा में अभी सालाना लगभग 2.63 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता है, जो रोजाना लगभग 7.2 लाख लीटर के बराबर है। उन्होंने भरोसा जताया कि इस समझौते से राज्य के डेयरी सहकारी क्षेत्र का आधुनिकीकरण होगा, जिससे दूध का उत्पादन बढ़ेगा और राज्य ज्यादा आत्मनिर्भर बनेगा।

एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार, एनडीडीबी और गोमती कोऑपरेटिव मिल्क प्रोड्यूसर्स यूनियन लिमिटेड (जीसीएमपीयूएल) के बीच सहयोग से एक मजबूत और टिकाऊ डेयरी इकोसिस्टम बनाने में मदद मिलेगी, जिससे हजारों किसानों और ग्रामीण परिवारों को फायदा होगा।

डेयरी क्षेत्र में बदलाव की जरूरत पर जोर देते हुए साहा ने कहा कि त्रिपुरा को देश की डेयरी-आधारित ‘श्वेत क्रांति’ सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। उन्होंने दूध का उत्पादन बढ़ाने, इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और किसानों की आय बढ़ाने के महत्व पर जोर दिया।

इस एमओयू का मकसद ‘श्वेत क्रांति 2.0’ के राष्ट्रीय विज़न के अनुरूप ‘व्यापक सहकारी डेयरी विकास योजना’ (सीसीडीडीपी) को लागू करना है। इस साझेदारी का लक्ष्य सहकारी समितियों को मजबूत करना, उत्पादकता बढ़ाना, इंफ्रास्ट्रक्चर को आधुनिक बनाना, डिजिटलाइजेशन को बढ़ावा देना और टिकाऊ आजीविका के अवसर पैदा करना है।

पशुधन विकास में हुई प्रगति का जिक्र करते हुए साहा ने बताया कि त्रिपुरा में दूध का उत्पादन सालाना लगभग 6.5 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और प्रति व्यक्ति उपलब्धता 173 ग्राम प्रतिदिन तक पहुंच गई है, जो पूर्वोत्तर राज्यों में सबसे ज्यादा है। हालांकि, उन्होंने देखा कि इसका केवल एक छोटा हिस्सा ही संगठित प्रोसेसिंग नेटवर्क तक पहुंचता है।

उन्होंने कहा कि राज्य के डेयरी प्लांट में रोजाना 40,000 लीटर दूध प्रोसेस करने की क्षमता है, लेकिन इसका पूरी तरह से इस्तेमाल नहीं हो पा रहा है। उन्होंने कहा कि दूध की खरीद बढ़ने से पनीर, दही, घी, लस्सी, आइसक्रीम और मिठाइयों जैसे वैल्यू-एडेड उत्पादों के विस्तार में मदद मिलेगी, जिससे अतिरिक्त आय के अवसर पैदा होंगे।

एनडीडीबी के चेयरमैन मीनेश शाह ने त्रिपुरा में सहकारी डेयरी विकास के लिए एक रोडमैप पेश किया, जिसमें उत्पादकता, इंफ्रास्ट्रक्चर और बाज़ार तक पहुंच पर ध्यान दिया गया। समझौते के तहत, राज्य सरकार नीतिगत सहायता देगी, जीसीएमपीयूएल नोडल एजेंसी के तौर पर काम करेगा और एनडीडीबी तकनीकी विशेषज्ञता, क्षमता निर्माण और बाजार विकास में मदद करेगा। इस कार्यक्रम में पशु संसाधन विकास मंत्री सुधांशु दास, सहकारिता मंत्री शुक्ला चरण नोआतिया, वरिष्ठ अधिकारी और डेयरी क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।

–आईएएनएस

एससीएच


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