भाजपा के पास छात्रों से जुड़े मुद्दों पर दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं: प्रियांक खड़गे


बेंगलुरु, 22 जून (आईएएनएस)। कर्नाटक सरकार में मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को विपक्ष के उस आरोप का जवाब दिया, जिसमें कहा गया था कि बेंगलुरु में हुए एक सरकारी कार्यक्रम के कारण कुछ छात्र नीट की दोबारा परीक्षा नहीं दे पाए। उन्होंने सवाल उठाया कि हजारों अन्य उम्मीदवार समय पर अपने परीक्षा केंद्रों तक कैसे पहुंच पाए।

रविवार को बेंगलुरु के कई सेंटर्स पर हजारों छात्र नीट री-एग्जाम में शामिल हुए, लेकिन खबर है कि राज्य के नेताओं के एक बड़े कार्यक्रम की वजह से लगे ट्रैफिक प्रतिबंधों के कारण कुछ छात्र परीक्षा नहीं दे पाए।

बेंगलुरु में पत्रकारों से बात करते हुए खड़गे ने कहा कि भाजपा के पास छात्रों से जुड़े मुद्दों पर दूसरों को उपदेश देने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है।

उन्होंने कहा, “हमें भाजपा से सीख लेने की जरूरत नहीं है। अगर उन्हें सच में छात्रों की चिंता है, तो उन्हें उनसे माफी मांगनी चाहिए। पिछले 10 साल में लगभग 22 लाख छात्र प्रभावित हुए हैं और खबर है कि लगभग 90 बार परीक्षा के पेपर लीक हुए हैं। पहले उन्हें इसके लिए माफी मांगनी चाहिए।”

खड़गे ने माना कि तीन छात्र परीक्षा नहीं दे पाए, लेकिन उन्होंने इस आरोप को खारिज कर दिया कि इसके लिए सरकारी कार्यक्रम जिम्मेदार था।

उन्होंने कहा, “यह सच है कि तीन छात्र परीक्षा नहीं दे पाए। उनमें से एक पड़ोसी शहर मगदी से आ रहा था। क्या कांग्रेस की रैली मगदी में हुई थी? खबर है कि एक और छात्र पुराना हॉल टिकट लेकर आया था। तीसरा छात्र आरटी नगर से आ रहा था।”

उन्होंने बताया कि नीट की गाइडलाइंस में साफ तौर पर कहा गया है कि परीक्षा केंद्र के गेट सुबह 11 बजे खुलते हैं और उम्मीदवारों को तय समय-सीमा से काफी पहले पहुंचना होता है।

उन्होंने पूछा, “स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) बहुत स्पष्ट हैं। उम्मीदवारों को पहले ही बता दिया जाता है कि उन्हें परीक्षा से कम से कम ढाई घंटे पहले परीक्षा केंद्र पहुंचना होगा। अकेले आरजी कॉलेज में लगभग 720 छात्र परीक्षा में शामिल हुए, जबकि लगभग 120 अनुपस्थित थे। बाकी छात्र समय पर केंद्र कैसे पहुंच पाए?”

भाजपा पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लगाते हुए खड़गे ने कहा कि विपक्ष को राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश करने के बजाय इस मामले को तार्किक रूप से देखना चाहिए।

उन्होंने सवाल किया, “अगर वे राजनीति करना चाहते हैं, तो उन्हें तार्किक और जिम्मेदार तरीके से करनी चाहिए। सबसे पहले उन्हें माफी मांगनी चाहिए। दिल्ली में भी खबर है कि कुछ छात्र अपनी परीक्षा नहीं दे पाए। मुंबई के परेल और डोंबिवली इलाकों में भी छात्रों को ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ा। क्या इसका मतलब यह है कि वहां भाजपा के नेतृत्व वाली सरकारें जिम्मेदार हैं?”

खड़गे ने केंद्र सरकार के तहत देरी और प्रशासनिक खामियों से जुड़े पिछले उदाहरणों का भी जिक्र किया।

उन्होंने पूछा, “उत्तर प्रदेश में एक अदालत ने देरी के लिए रेलवे अधिकारियों पर 9 लाख रुपए का जुर्माना लगाया। क्या किसी ने इस्तीफा दिया? क्या केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस्तीफा दिया? नीट प्रश्न पत्र लीक विवाद के बाद क्या केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया?”

–आईएएनएस

डीकेएम/वीसी


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