आंध्र प्रदेश का वार्षिक ऋण लक्ष्य 8.10 लाख करोड़ रुपए तय, कृषि और एमएसएमई क्षेत्र पर जोर

अमरावती, 19 जून (आईएएनएस)। आंध्र प्रदेश के लिए वर्ष 2026-27 का वार्षिक ऋण योजना लक्ष्य 8.10 लाख करोड़ रुपए तय किया गया है, जो पिछले वर्ष के 6.60 लाख करोड़ रुपए के लक्ष्य की तुलना में 22.7 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू की अध्यक्षता में हुई राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति (एसएलबीसी) की बैठक में इस ऋण योजना को मंजूरी दी गई।
आधिकारिक बयान के अनुसार, कुल 8.10 लाख करोड़ रुपए में से 5.40 लाख करोड़ रुपए प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए निर्धारित किए गए हैं। वहीं 2.70 लाख करोड़ रुपए अन्य क्षेत्रों के लिए आवंटित किए गए हैं।
योजना के तहत कृषि क्षेत्र के लिए 3.60 लाख करोड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं, जिनमें 2 लाख करोड़ रुपए फसल ऋण के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा कृषि यंत्रीकरण के लिए बैंकों ने 10,693 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता का प्रस्ताव रखा है।
सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) क्षेत्र के लिए 1.55 लाख करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है, जिसमें 70,000 करोड़ रुपए सूक्ष्म उद्यमों के लिए हैं। इसके अलावा 11,500 करोड़ रुपए के आवास ऋण और 2,500 करोड़ रुपए के शिक्षा ऋण की भी योजना बनाई गई है।
बैंकों ने बताया कि वर्ष 2025-26 के दौरान कृषि क्षेत्र को 3,86,249 करोड़ रुपए के ऋण वितरित किए गए। वहीं, एमएसएमई क्षेत्र को 1,17,357 करोड़ रुपए और प्राथमिकता वाले क्षेत्रों को कुल 5,19,693 करोड़ रुपए का ऋण दिया गया।
बैंकर्स ने बताया कि आंध्र प्रदेश में ऋण वितरण दक्षिण भारत के अन्य राज्यों की तुलना में 137 प्रतिशत अधिक है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस वर्ष 15 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि का लक्ष्य रखा गया है और इसे हासिल करने के लिए बैंकों को आवश्यक वित्तीय सहायता उपलब्ध करानी होगी।
मुख्यमंत्री ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी अशोक पांडेय के साथ मिलकर वर्ष 2026-27 की वार्षिक ऋण योजना जारी की।
सीएम ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि बैंकों को एमएसएमई क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए उदारतापूर्वक ऋण उपलब्ध कराना चाहिए। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार भी ऋण स्वीकृति प्रक्रिया को अधिक सरल और स्वचालित बनाने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार रतन टाटा इनोवेशन हब के माध्यम से स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा दे रही है तथा बैंकों को योग्य उद्यमियों का समर्थन करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने ऋण वितरण और गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की निगरानी के लिए बैंकर्स और अधिकारियों की एक संयुक्त समिति गठित करने का प्रस्ताव भी दिया।
उन्होंने केंद्र प्रायोजित योजनाओं का पूर्ण उपयोग सुनिश्चित करने पर जोर दिया और ‘वन फैमिली, वन एंटरप्रेन्योर’ पहल के तहत बड़ी संख्या में उद्यमी तैयार करने की सरकार की योजना का उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन और जलीय कृषि क्षेत्र को भी अधिक वित्तीय सहायता देने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में संपत्ति सृजन की अपार संभावनाएं हैं और सब्सिडी योजना के तहत 200 यंत्रीकृत मछली पकड़ने वाली नौकाओं की खरीद के प्रस्ताव पहले ही भेजे जा चुके हैं।
उन्होंने घोषणा की कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री विद्यालक्ष्मी योजना के साथ समन्वय करते हुए शिक्षा ऋण पर अतिरिक्त 4 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी देने के लिए तैयार है। इसका उद्देश्य देश और विदेश में उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को अधिक अवसर उपलब्ध कराना है।
साइबर धोखाधड़ी पर चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने बैंकों को डिजिटल गिरफ्तारी, साइबर ठगी और अन्य वित्तीय अपराधों की रोकथाम के लिए विशेष मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने की सलाह दी।
उन्होंने कहा कि डिजिटल धोखाधड़ी के मामलों में पीड़ितों को वित्तीय नुकसान से बचाने के लिए बैंकों को तेजी से कार्रवाई करनी चाहिए। अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी में देरी के कारण लोगों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बैंकों को वित्तीय धोखाधड़ी की पहचान और रोकथाम के लिए केंद्रीय लेनदेन निगरानी केंद्र (सेंट्रल ट्रांजैक्शन मॉनिटरिंग सेल) स्थापित करने चाहिए। उन्होंने कहा कि डिजिटल गिरफ्तारी जैसी ठगी का शिकार पढ़े-लिखे लोग भी हो रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पिछले तीन महीनों में आंध्र प्रदेश में बड़ी संख्या में लोग इस तरह की साइबर धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं। बैंकों को इन अपराधों का विश्लेषण कर प्रभावी एसओपी लागू करनी चाहिए और व्यापक जनजागरूकता अभियान भी चलाने चाहिए।
–आईएएनएस
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