बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप से एक और बच्चे की मौत, मरने वालों की संख्या बढ़कर 643 हुई

ढाका, 13 जून (आईएएनएस)। बांग्लादेश में खसरे के बढ़ते प्रकोप के बीच, शुक्रवार को इस बीमारी से एक और बच्चे की मौत हो गई। इसके साथ ही 15 मार्च से अब तक खसरे से जुड़ी पुष्टि और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 643 हो गई है।
स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (डीजीएचएस) के मुताबिक, मौत की खबर शुक्रवार सुबह तक के 24 घंटों में मिली। बांग्लादेशी मीडिया आउटलेट यूएनबी ने बताया कि बीमारी से हुई सबसे नई मौत की पहचान संदिग्ध के तौर पर हुई है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जहां पुष्टि किए गए मौतों की संख्या 92 पर स्थिर रही, वहीं संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 551 तक पहुंच गई। इसका मतलब यह है कि 551 मौतें आधिकारिक तौर पर अब तक पुष्टि नहीं हुई हैं।
डीजीएचएस ने पिछले 24 घंटों में खसरे के कुल 1,027 संदिग्ध मामले दर्ज किए, जिससे संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 84,266 हो गई।
इसके अलावा, इसी समय में 126 नए कन्फर्म मामले सामने आए, जिससे कुल मामलों की संख्या बढ़कर 10,185 हो गई।
बांग्लादेशी अखबार, ढाका ट्रिब्यून, ने बताया कि सरकार के इस दावे के बावजूद कि वैक्सीनेशन कवरेज टारगेटेड बच्चों में से 100 फीसदी से ज्यादा हो गया है, देश में खसरे का गंभीर प्रकोप फैलता जा रहा है। इससे वैक्सीन के प्रभाव और कवरेज में कमी को लेकर टीकाकरण के विशेषज्ञों में चिंता बढ़ गई है।
देशव्यापी आपातकालीन खसरा टीकाकरण अभियान समाप्त हुए एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद, देशभर के अस्पतालों में रोजाना 1,000 से अधिक बच्चों को खसरे या खसरे जैसे लक्षणों के साथ भर्ती किया जा रहा है। वहीं, इस बीमारी से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी लगातार बढ़ता जा रहा है।
मामलों में लगातार हो रही वृद्धि ने सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि केवल टीकाकरण कवरेज बढ़ जाना पर्याप्त नहीं होता, जब तक कि बच्चों में संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) विकसित न हो जाए।
ढाका ट्रिब्यून ने सरकार की बीमारी नियंत्रण ब्रांच के पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद के हवाले से कहा, “जब वैक्सीन कवरेज 90 फीसदी से ज्यादा हो जाएगा, तो खसरा का फैलाव काफी कम हो जाना चाहिए। अगर टीकाकरण सच में बताए गए स्तर पर पहुंच गया है, तो अब तक संक्रमण में और भी तेजी से कमी आ जानी चाहिए थी।”
पूर्व निदेशक बे-नजीर अहमद का कहना है कि सरकारी आंकड़ों में तय किए गए लक्ष्य संभवतः टीकाकरण के लिए पात्र बच्चों की वास्तविक संख्या को पूरी तरह नहीं दर्शाते।
उन्होंने कहा, “कुछ मामलों में, कागज पर कवरेज 100 फीसदी दिख सकता है, जबकि असल में हजारों बच्चों को वैक्सीन नहीं लगी होती।”
–आईएएनएस
केके/डीएससी