जिम भी स्वास्थ्य से जुड़ा है, इसलिए ट्रेनरों का सत्यापन जरूरी : मौलाना कासमी

गाजियाबाद, 12 जून (आईएएनएस)। उत्तर प्रदेश के शामली में हुई जिम जिहाद की घटना और धर्मांतरण का मामला सामने आने के बाद जिम ट्रेनरों और जिम संचालकों की पहचान तथा योग्यता की जांच को लेकर सरकार ने सख्त निर्देश जारी किए हैं। मौलाना मुफ्ती मोहम्मद साजिद कासमी ने फैसले को स्वागतयोग्य बताया।
उन्होंने कहा कि लोगों की सुरक्षा के लिए सर्टिफाइड और सही पहचान वाले प्रोफेशनल जरूरी हैं और शामली की घटना के बाद उठाया गया यह कदम एक सकारात्मक पहल है।
उन्होंने शामली की घटना के बाद जारी किए गए इस आदेश पर कहा, “मैं समझता हूं कि कोई भी कार्य हो रहा है तो उससे जुड़े व्यक्ति की एक स्पष्ट पहचान होनी चाहिए। उसका पंजीकरण (नोटिफिकेशन) होना चाहिए और उसका आधार कार्ड या अन्य पहचान पत्र जांच लिया जाना चाहिए। यह भी देखा जाना चाहिए कि वह उस कार्य के लिए योग्य है या नहीं।”
मौलाना ने कहा कि यदि कोई डॉक्टर है और उसके पास डिग्री है, उसने अपना क्लिनिक खोला हुआ है, तो यह अच्छी बात है। लेकिन यदि उसके पास आवश्यक डिग्री नहीं है, तो उसे डॉक्टर कहलाने का अधिकार नहीं है और न ही इलाज करने का अधिकार होना चाहिए। इस्लाम सहित सभी धर्मों में योग्यता और ज्ञान को महत्व दिया गया है। इसी वजह से कहा जाता है, ‘नीम हकीम खतरा-ए-जान’।
उन्होंने कहा कि जिम का मामला भी कुछ ऐसा ही है। जिम में भी लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ा विषय होता है। यदि कोई ट्रेनर अपनी पहचान के साथ आए, उसके दस्तावेज पहले से सत्यापित हों और उसे इस योग्य माना जाए कि वह जिम चलाने या प्रशिक्षण देने के लिए सक्षम है, तो यह अच्छी बात है।
उन्होंने कहा, “पहले ऐसी कोई व्यवस्था नहीं थी। लेकिन अगर अब यह कदम उठाया गया है तो ‘देर आए, दुरुस्त आए’। यह पहल भी अच्छी है और इसका स्वागत किया जाना चाहिए।”
–आईएएनएस
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