अमेरिकी सीनेट की सुनवाई में चीन के साथ एआई की होड़ मुख्य मुद्दा बनी

वॉशिंगटन, 12 जून (आईएएनएस)। अमेरिका की दोनों पार्टियों के सांसदों ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़ी सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत नहीं करता है, तो उसे चीन के मुकाबले अपनी तकनीकी बढ़त खोने का खतरा हो सकता है। सीनेट की एक सुनवाई में राष्ट्रीय सुरक्षा, नौकरियों और एआई के तेजी से विस्तार को लेकर बढ़ती चिंताओं पर जोर दिया गया।
एआई पर सीनेट बैंकिंग कमेटी की सुनवाई में चेयरमैन टिम स्कॉट ने कहा कि अमेरिका को यह पक्का करना होगा कि एआई अर्थव्यवस्था को मजबूत करे और साथ ही चीन जैसे प्रतिद्वंद्वियों को रणनीतिक बढ़त हासिल करने से रोके।
स्कॉट ने कहा, “आज, यह कमेटी एक सीधा लेकिन अहम सवाल पूछ रही है, हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सही इस्तेमाल कैसे करें?”
उन्होंने एआई को एक ताकतवर टूल बताया जो लागत कम कर सकता है, फाइनेंशियल सर्विस को बेहतर बना सकता है, छोटे व्यवसायों की मदद कर सकता है और नौकरियां पैदा कर सकता है। लेकिन उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि अमेरिका “चीन या किसी अन्य विरोधी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में तकनीकी बढ़त हासिल करने नहीं दे सकता।”
इस सुनवाई में वॉशिंगटन में दोनों पार्टियों के बीच सहमति का एक दुर्लभ उदाहरण देखने को मिला।
रैंकिंग मेंबर एलिज़ाबेथ वॉरेन ने ट्रंप प्रशासन की एआई नीतियों की कड़ी आलोचना करते हुए चीन को एडवांस्ड चिप्स और कंप्यूटिंग टेक्नोलॉजी के जाने पर भी चिंता जताई।
वॉरेन ने कहा, “एआई में बहुत संभावनाएं हैं। लेकिन अमेरिकी सही तौर पर चिंतित हैं कि यह हमारी अर्थव्यवस्था को और अधिक प्रभावित कर सकता है। कांग्रेस अब चुपचाप तमाशबीन नहीं बनी रह सकती, क्योंकि एआई से जुड़े जोखिम बढ़ रहे हैं और लाखों अमेरिकी चिप्स चीन भेजे जा रहे हैं।”
इस सुनवाई का मुख्य मुद्दा यह था कि क्या मौजूदा एक्सपोर्ट कंट्रोल (निर्यात पर नियंत्रण) इतने मजबूत हैं कि वे एडवांस्ड एआई चिप्स को सीधे या तीसरे देशों के जरिए चीन तक पहुंचने से रोक सकें।
हडसन इंस्टीट्यूट के सीनियर फेलो और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के पूर्व अधिकारी डेविड फीथ ने चेतावनी दी कि चीन की सैन्य, कमर्शियल और जियोपॉलिटिकल महत्वाकांक्षाओं को देखते हुए और भी मजबूत सुरक्षा उपाय जरूरी हैं।
जब वॉरेन ने पूछा कि एडवांस्ड एआई चिप्स के चीन के हाथों में पड़ने को लेकर पॉलिसी बनाने वालों को कितना चिंतित होना चाहिए, तो जवाब दिया, “मुझे लगता है, बहुत ज्यादा चिंतित।”
उन्होंने कहा कि अगर चीन को एडवांस्ड चिप्स मिल जाती हैं, तो इससे बीजिंग की सैन्य क्षमताएं मज़बूत हो सकती हैं और चीनी कंपनियों को ग्लोबल मार्केट में अमेरिकी टेक्नोलॉजी कंपनियों का मुकाबला करने में मदद मिल सकती है।
कई सांसदों ने चीन को एडवांस्ड एआई चिप्स और सेमीकंडक्टर बनाने वाले इक्विपमेंट के एक्सपोर्ट पर पाबंदियां और सख्त करने के लिए दोनों पार्टियों के समर्थन वाले कानून का समर्थन किया।
इन प्रस्तावों में एआई ओवरवॉच एक्ट, मैच एक्ट और चिप सिक्योरिटी एक्ट शामिल हैं। जब पूछा गया कि क्या कांग्रेस को इन उपायों को मंज़ूरी देनी चाहिए, तो फीथ ने जवाब दिया, “हाँ, और दोनों पार्टियों के मिलकर काम करने की तारीफ होनी चाहिए।”
नेशनल सिक्योरिटी के अलावा, सीनेटरों ने एआई के तेज़ी से बढ़ते इस्तेमाल के आर्थिक नतीजों पर भी चर्चा की।
एआई नाउ इंस्टीट्यूट की को-एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर सारा मायर्स वेस्ट ने चेतावनी दी कि एआई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स के लिए भारी कर्ज लेने से पूरी अर्थव्यवस्था के लिए जोखिम पैदा हो सकते हैं।
उन्होंने आम अमेरिकियों का जिक्र करते हुए कहा, “उन पर इसका गहरा असर पड़ेगा, भले ही उन्होंने सीधे तौर पर एआई में निवेश न किया हो। अगर इस सेक्टर में भारी गिरावट आती है, तो रिटायरमेंट अकाउंट, पेंशन, रोज़गार और क्रेडिट मिलने की सुविधा पर असर पड़ सकता है।”
एआई के समर्थकों का तर्क था कि यह टेक्नोलॉजी प्रोडक्टिविटी बढ़ा सकती है, हेल्थकेयर में सुधार कर सकती है, साइबर सिक्योरिटी मज़बूत कर सकती है और आर्थिक विकास को तेज कर सकती है। कई रिपब्लिकन सीनेटरों का मानना था कि अमेरिकी कंपनियों पर बहुत ज्यादा सख्ती करने से आखिरकार चीन की प्रतिस्पर्धी कंपनियों को फ़ायदा हो सकता है।
यह सुनवाई ऐसे समय में हो रही है जब वॉशिंगटन और बीजिंग आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और दूसरी एडवांस्ड टेक्नोलॉजी में लीडरशिप के लिए मुकाबला कर रहे हैं। इन टेक्नोलॉजी को आर्थिक विकास और नेशनल सिक्योरिटी, दोनों के लिए बहुत अहम माना जाता है।
–आईएएनएस
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